दिल्ली पुलिस ने रविवार को अज्ञात लोगों के खिलाफ एक मजिस्ट्रेट को कथित तौर पर धमकी देने के आरोप में गैर-संज्ञेय रिपोर्ट (NCR) दर्ज की। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब CJP ने आरोप लगाया है कि उसके दोनों नेताओं की रिहाई में देरी की जा रही है। पार्टी का दावा है कि जमानत से संबंधित चार जमानतदारों (श्योरिटी) को अस्पष्ट आधार पर खारिज कर दिया गया।
बता दें कि गैर-संज्ञेय रिपोर्ट आम तौर पर ऐसे अपराधों के संबंध में दर्ज की जाती है, जिनमें पुलिस बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकती या मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच नहीं कर सकती।
सुनवाई में देरी का लगाया आरोप
CJP की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि वह रविवार सुबह 11 बजे से पुलिस थाने में मौजूद थीं। जमानत की सुनवाई दोपहर 12 बजे होनी थी, लेकिन शाम 4 बजकर 42 मिनट तक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) वहां नहीं पहुंचे थे। ACP ही विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट (SEM) के रूप में भी काम करते हैं। रत्ना सिंह ने इस देरी को सत्ता का दुरुपयोग बताया। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मजिस्ट्रेट ने बाद में उन्हें बताया कि किसी व्यक्ति ने उन्हें धमकी भरा संदेश भेजा है।
रत्ना सिंह के मुताबिक, उनके वकीलों ने मजिस्ट्रेट से कहा कि अगर किसी ने धमकी दी है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने संदेश भेजने वाले का नंबर और नाम सामने रखने की मांग भी की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी वकील चार दिनों तक सुनवाई के लिए नहीं आए और पांचवें दिन पहुंचे। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकारी वकील मामले पर चर्चा करने और किसी को रिहा करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। हालांकि, इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
14 अक्टूबर से हिरासत में हैं दोनों नेता
सौरव दास और आशुतोष रंका को 14 अक्टूबर को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। आरोप है कि दोनों ने जंतर-मंतर के बंद दरवाजों को फांदकर परिसर में प्रवेश किया था। उस समय यह स्थान निर्धारित विरोध स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं था। CJP ने शनिवार को कहा था कि उसने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से सलाह ली है। पार्टी ने चेतावनी दी थी कि यदि रविवार तक दोनों नेताओं को रिहा नहीं किया गया, तो वह कानूनी कार्रवाई करेगी। CJP मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध कर रही है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
