दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका की जमानत प्रक्रिया से जुड़े एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) को कथित तौर पर धमकी देने के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस मामले में गंभीरता से जांच कर रही है।
CJP नेताओं की जमानत सुनवाई से जुड़े धमकी मामले में दिल्ली पुलिस की FIR (File Photo)
इस मामले के बीच CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने कहा है कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद उनका संगठन अपनी गतिविधियां जारी रखेगा। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, दिपके ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों में हुई गिरफ्तारियों और हिरासत की कार्रवाइयों के जरिए उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वे इससे पीछे नहीं हटेंगे।
अभिजीत दिपके को मिली सशर्त जमानत
दिल्ली पुलिस ने 16 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ रैली से पहले अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया था। यह रैली कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आयोजित की जानी थी। शनिवार को उन्हें सशर्त जमानत मिल गई, जिसके बाद उन्हें मंदिर मार्ग पुलिस थाने से रिहा कर दिया गया।
दिपके ने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रंका के लौटने के बाद पार्टी के कार्यकर्ता फिर एकजुट होंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होंने बताया कि वह कानूनी मामलों पर चर्चा करने के लिए अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर से मिलने जा रहे थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों नेताओं को रविवार को रिहा कर दिया जाएगा।
12 अक्टूबर को हुई थी गिरफ्तारी
CJP के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रंका और अन्य लोगों को जंतर-मंतर में कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जंतर-मंतर को निर्धारित विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं किए जाने का हवाला दिया गया था।
गिरफ्तारी के बाद दास और रंका को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। अजिंक्य शिंदे ने उनकी गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा था कि तिरंगा लहराना अपराध नहीं है। इस बीच, SEM को कथित धमकी देने के मामले में दिल्ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। धमकी देने वालों की पहचान और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
