Kishtwar Cloudburst: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की हर्षिल वैली में हुए बादल फटने का खौफ अभी थमा भी नहीं था कि एक और दिल दहला देने वाली खबर आ गई। गुरुवार, 14 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में आसमान ने फिर कहर बरपाया। मचैल माता यात्रा मार्ग पर अचानक बादल फटा और देखते ही देखते पानी का रौद्र रूप बनकर फ्लैश फ्लड आ गया। तेज बहाव और गड़गड़ाहट के बीच यात्रियों में चीख-पुकार मच गई, लोग इधर-उधर भागने लगे, लेकिन कई यात्री पानी और मलबे के बीच फंस गए। घाटी में हर तरफ अफरातफरी का मंजर था, जबकि बचाव दल लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटा हुआ है।
किश्तवाड़ के चशोती इलाके में आसमान ने जैसे अपना कोप बरपा दिया। बादल फटने की भीषण गर्जना के साथ ही पहाड़ों से मलबा और पानी का सैलाब बेकाबू होकर नीचे उतरा। पलक झपकते ही गांव की गलियां जलमग्न हो गईं। तेज बहाव में लोग, मवेशी और घरों का सामान बहने लगे। चीख-पुकार के बीच बचाव दल जान पर खेलकर फंसे हुए लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। हर पल खतरे और अनिश्चितता से भरा है, लेकिन राहतकर्मी एक-एक जान बचाने में जुटे हैं।
पुंछ में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने मेंढर नदी को उफान पर ला दिया है। पानी का रौद्र रूप इतना विकराल है कि नदी किनारे की सड़कें और रास्ते पूरी तरह डूब चुके हैं। जगह-जगह पानी का बहाव तेज है, जिससे लोगों का आवागमन ठप हो गया है। तेज धाराओं के बीच लोग अपने घरों में कैद हैं और हर पल पानी के और बढ़ने का डर सता रहा है।
साथ पुंछ में ही सुखा कथा नाला और आसपास के अन्य जलाशय मानो अपनी सारी सीमाएं तोड़ चुके हैं। पानी का तेज बहाव सड़कों को चीरते हुए बस्तियों तक पहुंच गया है। जहां कभी सड़कें थीं, अब वहां मटमैला, उफनता हुआ पानी बह रहा है। ग्रामीण ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं, जबकि बारिश रुकने के कोई आसार नहीं दिख रहे। घाटी में मानो प्रकृति ने अपने रौद्र रूप से सब कुछ थाम दिया है।
