अप्रैल-जून तिमाही की GDP वृद्धि दर को लेकर उठ रहे सवालों पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि अगर 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि के आंकड़े वास्तविक हैं तो यह अच्छी बात है, लेकिन अगर आंकड़ों में किसी तरह की हेराफेरी हुई है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
मायावती ने केंद्र से मांगा जवाब।
मायावती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में महंगाई गरीबी और बेरोजगारी को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि महंगाई,गरीबी और बेरोजगारी की मार झेल रहे लोगों के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर भरोसा किस पर किया जाए। साथ ही उन्होंने सरकार से GDP के आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर पैदा हुए संदेह को दूर करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि ऊंची GDP वृद्धि का देश के करोड़ों गरीब और मेहनतकश लोगों को अब तक क्या फायदा मिला है और भविष्य में उन्हें इसका कितना लाभ मिलेगा।
‘GDP के आंकड़े जमीन पर दिखने वाले बदलाव से परखे जाएंगे’
मायावती ने कहा कि विकास के आंकड़े और सरकार के दावे महत्वपूर्ण हैं,लेकिन उनकी असली कसौटी जमीन पर दिखाई देने वाला बदलाव है। मायावती ने कहा कि विकास वही है जो लोगों के जीवन में समान और उपयोगी बदलाव लाए तथा उन्हें बेहतर और खुशहाल जीवन दे।
बीएसपी प्रमुख ने कहा कि GDP वृद्धि के आंकड़ों का अपना महत्व है, लेकिन विकास के वास्तविक लाभार्थियों तक उसका फायदा पहुंचना भी उतना ही जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर देश की बड़ी आबादी को अमीर सरकार के अधीन गरीब जनता का बोझ उठाते रहना पड़ेगा।
GDP आंकड़ों पर कैसे शुरू हुआ विवाद?
बता दें कि जीडीपी के नए आंकड़ों को लेकर विवाद तब तेज हुआ, जब पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने एक इंटरव्यू में आरोप लगाया कि मौजूदा आर्थिक प्रदर्शन को बेहतर दिखाने के लिए पुराने आंकड़ों में बदलाव किया गया है। इसके बाद कांग्रेस ने उनके आरोपों को आधार बनाकर सरकार से पिछले साल के GDP आंकड़ों को लेकर स्पष्टीकरण मांगा और डेटा में हेरफेर का आरोप लगाया।केंद्र ने खारिज किए आरोप
हालांकि,केंद्र सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि GDP की वृद्धि दर में बदलाव नई सांख्यिकीय पद्धति और संशोधित आंकड़ों के कारण आया है। 2 सितंबर को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने भी GDP आंकड़ों का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि पिछले वर्ष के आंकड़ों में संशोधन और अलग-अलग मूल्य सूचकांकों के बीच अंतर अपडेट किए गए डेटा और नई अनुमान तकनीकों का परिणाम है। मंत्रालय के अनुसार इसका उद्देश्य GDP वृद्धि दर को कृत्रिम रूप से बढ़ाना नहीं है।
