Sambhal: उत्तर प्रदेश के संभल से एक बड़ी खबर सामने आई है। संभल शाही मस्जिद कमेटी ने एएसआई से मस्जिद की रंगाई करने की परमिशन मांगी है। कमेटी ने रंगाई परमिशन रमजान का हवाला देते हुए मांगी है। संभल की शाही मस्जिद कमेटी द्वारा एएसआई को भेजे गए पत्र में लिखा गया है कि हर साल रमजान से पहले मस्जिद की रंगाई-पुताई एंव सजावट का काम किया जाता था। कमेटी द्वारा इसमें सुप्रीम कोर्ट का हवाला भी दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि 'साफ सफाई और रंगाई को लेकर कोई रोक नहीं है।' बता दें कि 24 नवंबर को संभल में हुई बवाल के बाद से स्थिति को देखते हुए अनुमति मांगी गई है ताकि अनावश्यक विवाद से बचा जा सके।
संभल जामा मस्जिद कमेटी ने रंगाई के लिए मांगी परमिशन
एएसआई से मस्जिद की रंगाई के लिए मांगी गई अनुमति
बताया जा रहा है कि हर साल रमजान का महीना शुरू होने से पहले मस्जिद की रंगाई और साज-सजावट का कार्य किया जाता था। लेकिन इसके लिए कभी भी किसी से कोई अनुमति नहीं मांगी गई थी। इस साल भारतीय पुरातत्व विभाग से अनुमति मांगने के पीछे की मुख्य वजह संभल में 24 नवंबर 2024 को हुआ बवाल है। मस्जिद कमेटी का कहना है कि वह अनावश्यक विवाद से बचने के लिए इजाजत मांग रहे हैं। जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली एडवोकेट द्वारा एएसाई को अनुमति मांगने का पत्र भेजा गया है।
24 नवंबर को क्या हुआ था
संभल मस्जिद मामला 19 नवंबर 2024 से चर्चा में आया। जब हिंदू पक्ष की ओर से सिविल सीनियर डिवीजन चंदौसी द्वारा कोर्ट में संभल की शाही जामा मस्जिद को श्री हरिहर मंदिर होने का दावा किया गया। इसके बाद उसी शाम को मस्जिद में पहले चरण का सर्वे शुरू किया गया। पहले चरण के बाद दूसरे चरण का सर्वे 24 नवंबर को हुआ। दूसरे चरण के सर्वे के दिन हजारों की संख्या में लोग आए और पुलिस पर पथराव और फायरिंग शुरू कर दी। इस घटना में 4 लोगों की मौत भी हो गई। भारी संख्या में इकट्ठा हुए लोगों ने गाड़ियों में आग लगा दी। 24 नवंबर को हुए इस बवाल के बाद से पुलिस के अलावा PAC-RRF को इस क्षेत्र में तैनात किया गया है। साथ ही सीसीटीवी कैमरे से भी निगरानी की जा रही है। इसी स्थिति को देखते हुए अनावश्यक विवाद से बचने के लिए मस्जिद कमेटी ने एएसआई से रंगाई की परमिशन मांगी है।
