गुजरात में बिना मान्य डिग्री के मरीजों का इलाज करने वाले कथित फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने राज्यव्यापी अभियान चलाया। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया के मार्गदर्शन में 15 दिनों तक चली इस मेगा ड्राइव के दौरान 38 संदिग्ध डॉक्टरों को पकड़ा गया। इनमें से 35 के खिलाफ FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
प्रतीकात्मक फोटो
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने बताया कि इस अभियान के लिए पूरे राज्य में स्वास्थ्य विभाग की 298 टीमें बनाई गई थीं। इन टीमों ने स्थानीय पुलिस, क्राइम ब्रांच और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के साथ मिलकर अलग-अलग जिलों में जांच और छापेमारी की।
राजकोट में सबसे ज्यादा 17 फर्जी डॉक्टर मिले
मंत्री के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान सबसे ज्यादा 17 संदिग्ध फर्जी डॉक्टर राजकोट में पकड़े गए। इन सभी 17 के खिलाफ FIR दर्ज की गई। इसके अलावा सूरत में 9, गिर सोमनाथ में 3 और सुरेंद्रनगर में 2 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अन्य इलाकों में भी एक-एक व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की गई। इस तरह कुल 35 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई।
पानशेरिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमों को कई जगहों से सूचना मिली थी, जिसके आधार पर छापेमारी की गई। कुछ संदिग्ध लोग टीमों के पहुंचने से पहले ही क्लीनिक बंद करके चले गए या मौके पर नहीं मिले। ऐसे लोगों की तलाश और निगरानी जारी है।
जिलावार समितियां बनाकर की जा रही कार्रवाई
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई के लिए पहले से जारी सरकारी निर्देशों के तहत जिलावार विशेष समितियां बनाई गई हैं। इन समितियों में तालुका हेल्थ ऑफिसर, मेडिकल हेल्थ ऑफिसर, संबंधित क्षेत्र के पुलिस सब-इंस्पेक्टर, पुलिस हेड कॉन्स्टेबल, मल्टीपर्पज हेल्थ सुपरवाइजर, तालुका हेल्थ ऑफिस के सीनियर क्लर्क और संबंधित गांव या क्षेत्र के तलाटी-कम-मंत्री शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ये समितियां स्थानीय सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि दिवाली और त्योहारों के बाद भी फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
नागरिकों से संदिग्ध डॉक्टरों की शिकायत करने की अपील
स्वास्थ्य मंत्री ने नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय प्रतिनिधियों से अपील की है कि यदि उनके क्षेत्र में कोई व्यक्ति बिना मान्य डिग्री के चिकित्सा अभ्यास करता दिखाई दे, तो इसकी सूचना नजदीकी PHC, CHC, पुलिस स्टेशन या SOG को दें।उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में मुफ्त इलाज, दवाइयां और लैब जांच की सुविधाएं उपलब्ध हैं। निजी अस्पतालों में भी मरीजों को केवल मान्य मेडिकल डिग्री और पंजीकरण रखने वाले डॉक्टरों से ही इलाज कराना चाहिए।
