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भारत के खिलाफ माथा पीटते रह गए Trump, अमेरिकी वित्त मंत्री ने बताया Tariff वाला खेल क्यों हुआ फेल?

रूस से तेल खरीदने के खिलाफ टैरिफ के जरिये भारत पर दबाव बनाने की कोशिशें नाकाम हो रहीं। अमेरिकी वित्त मंत्री ने खुद बताया है क्यों अमेरिका भारत पर दबाव नहीं बना पाया?

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Trump Tariff on India Russia Oil

US Tariff on India Russia Oil : रूस से कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की अमेरिकी रणनीति पूरी तरह विफल साबित हुई है। खुद अमेरिकी वित्त मंत्री (Treasury Secretary) स्कॉट बेसेंट ने यह माना है। उन्होंने यह बात तब कही है, जब खुद अमेरिका रूस से डीजल खरीद रहा है।

अमेरिका के दोहरे मानदंडों पर सवालों के बीच अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने खुलासा किया है कि अमेरिका ने भारत और चीन पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने के लिए यूरोपीय सहयोगियों से मदद मांगी थी, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहते थे कि यूरोपीय यूनियन और दूसरे सहयोगी देश भारत और चीन पर रूसी तेल खरीद के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों में मदद करें लेकिन, तमाम देशों ने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया।

NBC को दिए इंटरव्यू में स्कॉट बेसेंट ने कहा "हमने वसंत में अपने यूरोपीय सहयोगियों से चीन और भारत पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने में साथ देने को कहा था। उन्होंने इनकार कर दिया। फिर अमेरिका ही इसका बोझ क्यों उठाए?"

यूरोप खुद खरीद रहा रूस से तेल और गैस

बेसेंट ने यूरोपीय देशों पर रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने का आरोप लगाते हुए उनके दोहरे रुख पर सवाल उठाया। उन्होंने रूस की यमाल (Yamal) सुविधा से रवाना होने वाली गैस की खेपों का जिक्र किया। उनके अनुसार, साल 2026 के पहले 6 महीनों में यमाल सुविधा से 140 खेपें रवाना हुईं। इनमें से 136 खेपें बेल्जियम, स्पेन, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों में पहुंचीं। बेसेंट के मुताबिक, इन खेपों की कीमत 8 अरब डॉलर से अधिक थी।

भारत पर 100% तक टैरिफ की तैयारी

अमेरिका में पिछले दिनों ग्राहम एक्ट पारित किया गया, जिसके तहत रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले बड़े आयातक देशों से आने वाले सामान पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इसके संभावित दायरे में भारत और चीन जैसे देश भी आते हैं। यह प्रस्ताव सीधे रूसी तेल पर 100% आयात शुल्क लगाने से अलग है। इसके तहत अमेरिका उन देशों से आने वाले सामान पर टैरिफ लगा सकता है, जो रूस से ऊर्जा खरीद रहे हैं।

पलटने लगे अमेरिकी नेताओं के सुर

अब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि भारत अमेरिका का एक अहम सहयोगी है और टैरिफ या प्रतिबंध लगाने से पहले उनके आर्थिक प्रभावों को समझना जरूरी है। जबकि, कुछ दिन पहले तक तमाम अमेरिकी नेता भारत को सबक सिखाने की बात कर रहे थे।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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