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मार्क फैबर ने क्यों कहा इंडिया का बुल मार्केट दौर खत्म, अब कहां बनेगा पैसा?

भारतीय शेयर बाजार को लेकर ग्लूम, बूम और डूम के फाउंडर मार्क फैबर का कहना है कि इंडिया का बुल मार्केट दौर खत्म हो गया है। इसके साथ ही बताया कि अब पैसा कहां बनेगा?

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मार्क फैबर ने बदला भारतीय बाजार पर रुख

Marc Faber India stock market Investment strategy : दिग्गज निवेशक और ग्लूम, बूम एंड डूम रिपोर्ट के फाउंडर एडिटर मार्क फैबर ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर ऐसी चेतावनी दी है, जो निवेशकों की चिंता बढ़ा सकती है। उनका मानना है कि भारत में पिछले कुछ वर्षों से चल रहा ग्रेट बुल मार्केट अब खत्म हो चुका है और बाजार बेयर मार्केट के दौर में पहुंच गया है।

बड़ा सवाल यह है कि फैबर को भारतीय बाजार में आखिर ऐसा क्या खराब दिख रहा है। क्या विदेशी निवेशकों की बिकवाली, बढ़ती ब्याज दरें और AI शेयरों की महंगी वैल्यूएशन बाजार का रुख बदल सकती हैं? और अगर शेयरों से दूरी बनानी चाहिए, तो पैसा कहां लगाने का मौका है?

क्यों फैबर मान रहे भारत का बुल मार्केट खत्म?

'द ग्लूम, बूम एंड डूम रिपोर्ट' के एडिटर ने बिजनेस स्टैंडर्ड को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारतीय शेयर बाजार सितंबर 2024 में अपने पीक पर पहुंचा था। उसके बाद बाजार में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उनके आकलन में निवेशकों को लगातार और मजबूत रिटर्न नहीं मिल पाया है।

फैबर के मुताबिक, समस्या केवल शेयरों की गिरावट तक सीमित नहीं है। वह मानते हैं कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी के कारण एसेट प्राइस पर दबाव है। उनके अनुसार, बाजार में लिक्विडिटी यानी निवेश के लिए उपलब्ध पूंजी भी सख्त हो रही है। इसका असर शेयरों के साथ दूसरे निवेश विकल्पों पर भी पड़ सकता है।

तीन वजहों से बदला भारतीय बाजार पर रुख

  1. ब्याज दरें और लिक्विडिटी : जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं और पूंजी आसानी से उपलब्ध नहीं होती, तो निवेशकों के लिए महंगे शेयरों को ऊंची वैल्यूएशन पर खरीदना कठिन हो सकता है।
  2. विदेशी निवेशकों का रुख : फैबर का मानना है कि विदेशी निवेशक दुनिया भर के बाजारों में अपना एक्सपोजर घटा सकते हैं। ऐसा होने पर भारत जैसे बाजारों में भी विदेशी पूंजी का दबाव बना रह सकता है।
  3. चुनिंदा शेयरों के भरोसे बाजार की तेजी : फैबर के अनुसार, अमेरिका में S&P 500 जैसे इंडेक्स को कुछ बड़ी कंपनियां ऊपर खींच सकती हैं, जबकि बड़ी संख्या में दूसरे शेयर कमजोर प्रदर्शन करते रहते हैं। उनके मुताबिक, बाजार की यह तेजी व्यापक मजबूती का संकेत नहीं मानी जानी चाहिए।

अभी और कितनी गिरावट आएगी?

फैबर ने भारतीय बाजार में गिरावट की कोई निश्चित प्रतिशत सीमा नहीं बताई है। उनका कहना है कि कुछ शेयरों में बड़ी गिरावट हो सकती है, जबकि दूसरे शेयरों पर इसका असर अपेक्षाकृत कम पड़ सकता है। हालांकि, फैबर का यह आकलन बाजार की एक नकारात्मक राय है, कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं। बाजार की दिशा कंपनियों के नतीजों, ब्याज दरों, कच्चे तेल और निवेशकों के रुख जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।

अमेरिकी बाजार में क्रैश की आशंका

उनकी चिंता अमेरिका के बाजार को लेकर भी है। फैबर का मानना है कि वहां हाई वैल्यूएशन वाले टेक्नोलॉजी शेयरों की कमाई को लेकर उम्मीदें जरूरत से ज्यादा हो सकती हैं। यदि कंपनियां उन उम्मीदों पर खरी नहीं उतरतीं, तो बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

भारत में भी निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि कंपनियों की कमाई, वैल्यूएशन और विदेशी निवेशकों के प्रवाह में क्या बदलाव आता है।

AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों पर फैबर का रुख बेहद सतर्क है। उनका मानना है कि AI शेयरों में बना बुलबुला फूटना शुरू हो गया है और इसका असर सेमीकंडक्टर तथा क्लाउड कंप्यूटिंग कंपनियों तक फैल सकता है। उनके मुताबिक, इस सेक्टर में करेक्शन की गुंजाइश अभी बाकी है। इसी वजह से वह AI और सेमीकंडक्टर शेयरों से बचने की सलाह देते हैं।

अब कहां मौका देख रहे हैं मार्क फैबर?

फैबर की रणनीति में सबसे अहम बदलाव यह है कि वह शेयरों में जोखिम घटाने के साथ बॉन्ड और कैश को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने अलग-अलग निवेश विकल्पों को लेकर अपनी राय भी स्पष्ट की है।

निवेश विकल्प मार्क फैबर की राय उनका तर्क
अमेरिकी 10 साल के ट्रेजरी बॉन्डआकर्षककरीब 5% यील्ड और बॉन्ड की कीमत बढ़ने की संभावना
कैश (नकदी)होल्डिंग बढ़ाने की सलाहबाजार में अनिश्चितता के बीच निवेश के लिए लचीलापन बनाए रखना
तेल और एनर्जी शेयरपसंदीदा विकल्पफैबर के मुताबिक, सोने और चांदी के मुकाबले तेल अपेक्षाकृत सस्ता है और एनर्जी सेक्टर में निवेशकों की हिस्सेदारी कम है
हाई डिविडेंड शेयरचुनिंदा निवेश का मौकानियमित आय की संभावना, लेकिन कंपनियां डिविडेंड घटा भी सकती हैं
यूटिलिटी शेयरसंभावित अवसरअमेरिका में मंदी आने पर ब्याज दरें घटती हैं, तो इन शेयरों को फायदा हो सकता है
सोना और प्लैटिनमसकारात्मक रुखफैबर के पास फिजिकल गोल्ड है और उन्होंने बताया कि वह प्लैटिनम भी खरीद रहे हैं
AI और सेमीकंडक्टर शेयरबचने की सलाहउन्हें इन शेयरों में वैल्यूएशन का जोखिम और आगे करेक्शन की आशंका दिख रही है

अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड पर सबसे बड़ा दांव

फैबर के मुताबिक, जोखिम के मुकाबले संभावित रिटर्न को देखें तो अमेरिकी 10 साल का ट्रेजरी बॉन्ड (US Treasury Bonds) उन्हें सबसे आकर्षक विकल्प लगता है। उन्होंने इसमें करीब 10% रिटर्न की संभावना जताई है। उनके आकलन के अनुसार, लगभग 5% की यील्ड के अलावा अगले 12 महीनों में बॉन्ड की कीमत में 5% से 15% तक की तेजी भी आ सकती है।

तेल में क्यों दिख रहा है कमाई का मौका?

फैबर ने तेल को अगले 12 महीनों के लिए आकर्षक निवेश विकल्प बताया है। उनका कहना है कि करीब 110 डॉलर प्रति बैरल का स्तर ऐतिहासिक मानकों पर बहुत ऊंचा है, लेकिन सोने और चांदी की तुलना में तेल उन्हें अपेक्षाकृत सस्ता लगता है।

उनका दूसरा तर्क यह है कि निवेशकों का बड़ा हिस्सा फिलहाल तेल कंपनियों और एनर्जी सेक्टर में निवेश किए हुए नहीं है। जियो पॉलिटिकल तनाव को देखते हुए वह इस सेक्टर के पक्ष में हैं।

हालांकि, ऊंचे क्रूड के दो पहलू हैं। जहां तेल उत्पादकों को इसका फायदा मिल सकता है, वहीं भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश में इससे महंगाई, कंपनियों की लागत और आर्थिक विकास पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए तेल की कीमत बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर एनर्जी शेयर भी बढ़ेगा।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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