जिस होर्मुज के लिए अमेरिका और ईरान लड़ रहे, उसका कौन है असली मालिक?

Strait of Hormuz पर ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ा विवाद अब 'टोल टैक्स' पर टिक गया है। $20 लाख प्रति जहाज की अवैध वसूली और मालिकाना हक की इस जंग ने वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री कानूनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग अमेरिका और ईरान की सहमति से 2 हफ्ते के लिए रोक दी गई है, दोनों देशों ने 14 दिन का सीजफायर ऐलान किया है। इस युद्ध की वजह से दुनिया की अर्थव्यवस्था दांव पर लगी है। यह लड़ाई अब केवल मिसाइलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि 33 किलोमीटर चौड़े एक समुद्री गलियारे 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पर शिफ्ट हो गई है। ईरान (Iran) ने इस रास्ते पर कब्जा जमाकर जहाजों से 20 लाख डॉलर (करीब 18 करोड़ रुपये) का टोल टैक्स वसूलने की योजना बनाई है। वहीं, अमेरिका ने इसे अवैध बताते हुए अंतिम चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने यह रास्ता नहीं खोला, तो वह सैन्य कार्रवाई कर सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस रणनीतिक रास्ते का असली मालिक कौन है? क्या अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत ईरान या कोई भी अन्य देश खुले समुद्र में टोल वसूल सकता है?

Strait Of Hormuz Owner

ईरान, ओमान या यूएई कौन है असली मालिक?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। भौगोलिक रूप से देखें तो इस रास्ते के एक तरफ ईरान है और दूसरी तरफ ओमान तथा यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के अनुसार, किसी भी देश का अपनी तटरेखा से 12 समुद्री मील (लगभग 22 किमी) तक के पानी पर अधिकार होता है, जिसे 'टेरिटोरियल वॉटर' कहा जाता है। चूंकि यह रास्ता बहुत संकरा है, इसलिए यहां 'मीडियन लाइन' (एक काल्पनिक बीच की रेखा) का सिद्धांत लागू होता है। इसका मतलब है कि उत्तरी हिस्सा ईरान का है और दक्षिणी हिस्सा ओमान का। लेकिन कानून यह भी कहता है कि चाहे पानी किसी भी देश की सीमा में आता हो, वह अंतरराष्ट्रीय जहाजों को 'शांतिपूर्ण पारगमन' (Innocent Passage) के लिए रोकने या उन पर टैक्स लगाने का अधिकार नहीं रखता।

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