आज के दौर में कॉर्पोरेट और डिजिटल वर्ल्ड में कदम रख रही 'Gen Z' (1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा) की सैलरी और उनके खर्च करने के तरीके पुरानी पीढ़ियों से काफी अलग हैं। जहां पहले के युवा अपनी पहली कमाई या शुरुआती सैलरी से बचत करने या सोने और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने के बारे में सोचते थे, वहीं आज के युवाओं की प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं। मनीकंट्रोल में छपी एक हालिया स्टडी के अनुसार, युवा कामकाजी आबादी अपनी सैलरी का एक बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा डिजिटल लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट और ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन सर्विसेज पर खर्च कर रही है।
नेटफ्लिक्स से लेकर जियोहॉटस्टार तक अपनी सैलरी कहां उड़ा रहे हैं Gen Z?
सबसे ज्यादा यहां खर्च कर रहे Gen Z
रिपोर्ट से पता चलता है कि युवाओं के मासिक बजट में नेटफ्लिक्स (Netflix), जियोहॉटस्टार (JioHotstar), और स्पॉटिफाए (Spotify) जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप्स के सब्सक्रिप्शन का दबदबा है। इन एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म्स के अलावा, स्विगी वन (Swiggy One), जोमैटो गोल्ड (Zomato Gold) और जेप्टो पास (Zepto Pass) जैसी क्विक-कॉमर्स और डिलीवरी मेंबरशिप भी उनकी सैलरी का एक निश्चित हिस्सा हर महीने निगल रही हैं। हालांकि, व्यक्तिगत तौर पर ये छोटे-छोटे मंथली सब्सक्रिप्शन प्लान देखने में काफी सस्ते लगते हैं, लेकिन जब इन्हें एक साथ मिलाकर देखा जाए तो यह महीने के अंत में एक बड़ी रकम बन जाते हैं।
ऑटो-डेबिट बन रही खर्च की बड़ी वजह
Gen Z की इस खास खर्च करने की आदत के पीछे 'सब्सक्रिप्शन इकॉनमी' (Subscription Economy) और 'इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन' (तुरंत संतुष्टि पाना) की सोच मुख्य वजह है। आज के युवा कंटेंट की सहज उपलब्धता, बिना विज्ञापन के गाने सुनने और 10-15 मिनट में खाना या राशन घर मंगवाने की सुविधा को प्राथमिकता देते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स द्वारा ऑफर किए जाने वाले ऑटो-डेबिट (Auto-Debited) फीचर्स की वजह से युवाओं के बैंक अकाउंट से ये पैसे हर महीने चुपचाप कट जाते हैं, जिससे उन्हें तुरंत अपनी जेब खाली होने का अंदाजा भी नहीं लगता।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि जीवनशैली को आसान बनाने के लिए डिजिटल सर्विसेज का इस्तेमाल करना गलत नहीं है, लेकिन बिना बजट बनाए दर्जनों सब्सक्रिप्शन ले लेना युवाओं की लॉन्ग-टर्म सेविंग्स को नुकसान पहुंचा रहा है। कई बार युवा ऐसे प्लेटफॉर्म्स का सब्सक्रिप्शन भी ले लेते हैं जिनका वे महीने में दो-तीन बार से ज्यादा इस्तेमाल भी नहीं करते। इस तरह के गैर-ज़रूरी और छिपे हुए खर्च युवाओं को इमरजेंसी फंड बनाने या म्यूचुअल फंड जैसी जगहों पर शुरुआती उम्र से निवेश करने से रोकते हैं।
