'मिल्क कैपिटल ऑफ इंडिया' क्या है? टैंकर भर-भरकर दूध देता है भारत का ये शहर

भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बनाने में गुजरात के आनंद शहर का ऐतिहासिक योगदान है। 'अमूल' की शुरुआत और श्वेत क्रांति का केंद्र रहे इस अनोखे शहर को आखिर 'मिल्क कैपिटल ऑफ इंडिया' क्यों कहते हैं?

गुजरात के आणंद (Anand) जिले और इसके मुख्य शहर को 'मिल्क कैपिटल ऑफ इंडिया' के नाम से जाना जाता है। इस शहर को यह अनूठा खिताब मिलने की वजह यहां का मजबूत डेयरी को-ऑपरेटिव नेटवर्क है। आनंद शहर ने भारत के ग्रामीण परिदृश्य और पशुपालकों की किस्मत बदलने में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। आज इस शहर और इसके आसपास के ग्रामीण इलाकों से रोजाना लाखों लीटर दूध निकाला जाता है, जिसे टैंकरों में भरकर देश के कोने-कोने में सप्लाई किया जाता है। यहां का हर दूसरा घर किसी न किसी रूप में डेयरी व्यवसाय से जुड़ा हुआ है, जिससे यहां दूध की नदियां बहती हैं।

Milk capital of India

श्वेत क्रांति (White Revolution) और अमूल की शुरुआत

आनंद शहर का 'मिल्क कैपिटल' बनने का सफर साल 1946 में शुरू हुआ था। उस समय स्थानीय किसानों को बिचौलियों और व्यापारियों के शोषण का सामना करना पड़ता था। इस शोषण से मुक्ति पाने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल और त्रिभुवनदास पटेल के मार्गदर्शन में किसानों ने मिलकर एक सहकारी मंडली बनाई, जिसे 'कैरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड' कहा गया। बाद में इसी का नाम बदलकर 'अमूल' (Anand Milk Union Limited - AMul) रखा गया। इसके बाद देश में श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन (Dr. Verghese Kurien) इस मुहिम से जुड़े। उन्होंने आनंद शहर को अपना केंद्र बनाया और आधुनिक तकनीकों व कुशल प्रबंधन के दम पर 'ऑपरेशन फ्लड' (Operation Flood) की शुरुआत की, जिसने देश का भाग्य बदल दिया।

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