आजकल कई बैंक और वित्तीय संस्थान FD पर लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा देते हैं। इसमें आपको अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती और जरूरत के समय पैसे मिल जाते हैं। लेकिन यह सुविधा मुफ्त नहीं होती। लोन पर ब्याज देना पड़ता है और FD को बैंक के पास सुरक्षा के रूप में रखा जाता है। अगर आप समय पर भुगतान नहीं करते, तो बैंक अपने नियमों और लोन एग्रीमेंट के अनुसार वसूली की कार्रवाई कर सकता है।
क्या बैंक आपकी FD जब्त कर सकता है?
अगर आपने FD के बदले लोन लिया है और लंबे समय तक बकाया नहीं चुकाते, तो बैंक आपकी जमा रकम से लोन की वसूली कर सकता है। इसके लिए बैंक FD को समय से पहले भुनाकर बकाया मूलधन, ब्याज और लागू शुल्क की रकम निकाल सकता है। हालांकि, यह कार्रवाई लोन की शर्तों और बैंक की प्रक्रिया के अनुसार होती है। इसलिए भुगतान में चूक होने पर बैंक के नोटिस को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
FD की पूरी रकम मिलेगी या नहीं?
यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी FD में कितनी रकम है और लोन का बकाया कितना है। उदाहरण के लिए, अगर आपकी FD में 2 लाख रुपये हैं और लोन का कुल बकाया ब्याज व शुल्क सहित 1.20 लाख रुपये है, तो बैंक नियमों के अनुसार बकाया वसूलने के बाद बची हुई रकम आपको मिल सकती है। लेकिन अगर FD की रकम लोन चुकाने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो बाकी पैसा भी आपको चुकाना पड़ सकता है। इसलिए यह मानना गलत है कि FD पर लोन लेने के बाद अधिकतम नुकसान सिर्फ FD की रकम तक ही सीमित रहेगा।
क्या लोन डिफॉल्ट होने से क्रेडिट स्कोर भी प्रभावित होगा?
हां, लोन का भुगतान समय पर नहीं करने पर आपके क्रेडिट रिकॉर्ड पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। बैंक या वित्तीय संस्थान भुगतान में देरी और डिफॉल्ट की जानकारी क्रेडिट ब्यूरो को दे सकता है। इससे भविष्य में पर्सनल लोन, होम लोन या क्रेडिट कार्ड लेने में परेशानी हो सकती है। लगातार भुगतान न होने पर लोन खाते को निर्धारित नियमों के अनुसार NPA भी घोषित किया जा सकता है।
भुगतान नहीं कर पा रहे हैं तो क्या करें?
अगर आपको लगता है कि आप लोन की किस्त या ब्याज समय पर नहीं चुका पाएंगे, तो बैंक से तुरंत संपर्क करें। बकाया रकम, ब्याज और अन्य शुल्क की जानकारी लें और भुगतान का विकल्प पूछें। जरूरत पड़ने पर उपलब्ध रकम से लोन का कुछ हिस्सा चुकाने पर भी विचार कर सकते हैं। ध्यान रखें, FD पर लोन लेने से पहले ब्याज दर, भुगतान की शर्तें और डिफॉल्ट की स्थिति में बैंक के अधिकार जरूर पढ़ें। इससे आपकी बचत और क्रेडिट रिकॉर्ड को नुकसान पहुंचने का जोखिम कम किया जा सकता है।
