केवल ज्यादा कमाई कर लेने से कोई व्यक्ति अमीर नहीं बन जाता। असली अंतर इस बात से पैदा होता है कि आप अपनी कमाई में से कितना पैसा बचाते हैं, उसे कहां निवेश करते हैं और अपने खर्चों को किस तरह मैनेज करते हैं। अक्सर देखा जाता है कि अच्छी-खासी सैलरी होने के बावजूद कई लोग महीने के अंत में आर्थिक तंगी का सामना करते हैं, जबकि सामान्य आय वाले कुछ लोग सही वित्तीय अनुशासन के दम पर धीरे-धीरे बड़ी संपत्ति बना लेते हैं। वित्तीय विशेषज्ञों और सीए अखिल कंचारला के अनुसार, लंबे समय में धन बनाने वाले लोगों की सोच और आदतें आम लोगों से काफी अलग होती हैं। अगर इन आदतों को नियमित जीवन में शामिल कर लिया जाए, तो वित्तीय स्वतंत्रता हासिल करना आसान हो जाता है।
अमीर लोग पैसे को बढ़ाने के लिए करते हैं ये काम, जानें अमीर और मिडिल क्लास के बीच असली फर्क!
अमीर लोगों में होती है ये आदतें
अमीरी और आर्थिक स्थिरता की दिशा में पहला नियम है पहले बचत और निवेश, फिर खर्च। ज्यादातर लोग सैलरी आते ही पहले अपने शौक और महीने के खर्चों पर पैसा उड़ाते हैं और अंत में बचा हुआ पैसा सेव करते हैं। इसके विपरीत, संपत्ति बनाने वाले लोग सैलरी आते ही अपनी आय का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा तुरंत बचत या म्यूचुअल फंड, ईपीएफ, पीपीएफ जैसे निवेश में डाल देते हैं और बची हुई रकम से अपना महीने का बजट चलाते हैं। इसके साथ ही, वे जल्दबाजी के बजाय नियमित निवेश (SIP) पर भरोसा करते हैं। बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराकर निवेश रोकने के बजाय वे लंबे समय तक टिके रहते हैं और केवल हालिया रिटर्न देखकर नहीं, बल्कि अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार सही जगह पैसा लगाते हैं।
दूसरा सबसे बड़ा फर्क 'लाइफस्टाइल इंफ्लेशन' (Lifestyle Inflation) को नियंत्रित करने में है। आमतौर पर सैलरी बढ़ते ही लोग अपने खर्चे और महंगे शौक भी उसी रफ्तार से बढ़ा लेते हैं, जिससे उनकी बचत शून्य ही रह जाती है। अमीर बनने की सोच रखने वाले लोग आय बढ़ने पर अतिरिक्त पैसे का बड़ा हिस्सा निवेश में लगाते हैं और केवल एक छोटा हिस्सा ही लाइफस्टाइल सुधारने पर खर्च करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपकी आय में 30,000 रुपये की बढ़ोतरी होती है, तो उसमें से 20,000 रुपये सीधे निवेश में बढ़ा देना चाहिए और केवल 10,000 रुपये अन्य खर्चों के लिए रखने चाहिए।
अमीर और मिडिल क्लास में अंतर
इसके अलावा, अमीर मानसिकता वाले लोग इंश्योरेंस को कभी भी रिटर्न देने वाला निवेश नहीं मानते, बल्कि उसे एक आर्थिक सुरक्षा कवच (Financial Protection) के रूप में देखते हैं। वे पर्याप्त हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म लाइफ इंश्योरेंस लेकर अपनी जमा पूंजी को किसी भी अनहोनी या मेडिकल इमरजेंसी से बचाते हैं। बीमा का काम पैसा बढ़ाना नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में आपके परिवार और बचत को सुरक्षा देना है। साथ ही, वे साल में कम से कम एक बार अपने पूरे वित्तीय पोर्टफोलियो की समीक्षा (Annual Financial Review) जरूर करते हैं, ताकि बदलते लक्ष्यों के अनुसार अपने निवेश, कर्ज और इमरजेंसी फंड में जरूरी बदलाव कर सकें।
दौलत बनाने का असली जादू कंपाउंडिंग (Compounding) और निरंतरता में छुपा है। हर महीने की छोटी सी बचत और अनुशासित निवेश समय के साथ एक विशाल फंड में तब्दील हो जाता है। इसलिए अमीर बनने के लिए सिर्फ अधिक कमाने की नहीं, बल्कि सही वित्तीय आदतों, खर्चों पर नियंत्रण, सही सुरक्षा और लंबे समय तक धैर्य बनाए रखने की जरूरत होती है।
