US Visa Rules Not Against India : अमेरिका में वीजा नियमों की सख्ती को लेकर भारतीय प्रोफेशनल्स और IT कंपनियों की चिंताओं के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति भारत को निशाना बनाकर नहीं बनाई गई है।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका का मकसद अपने इमिग्रेशन सिस्टम में लंबे समय से चली आ रही खामियों को दूर करना और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करना है। रुबियो के मुताबिक, अवैध इमिग्रेशन, बड़े पैमाने पर प्रवासन और वीजा प्रोग्राम के कथित दुरुपयोग को रोकना अमेरिकी प्रशासन की प्राथमिकता है। हालांकि, इस सख्ती का असर भारतीय छात्रों, कुशल कर्मचारियों और IT कंपनियों पर भी पड़ रहा है।
अमेरिका आखिर किसे रोकना चाहता है?
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने Indian Express को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रंप प्रशासन पिछले करीब 20 वर्षों से उपेक्षित इमिग्रेशन सिस्टम को दुरुस्त करने की कोशिश कर रहा है। उनका तर्क है कि जब वीजा नियमों का सही तरीके से पालन नहीं होता, तो इससे कानूनी तरीके से अमेरिका आने वाले लोगों के लिए भी मुश्किलें पैदा होती हैं।
रुबियो ने अवैध इमिग्रेशन और बड़े पैमाने पर प्रवासन को कानूनी इमिग्रेशन के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल भारत से जुड़ी नहीं है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से जिन मामलों पर सख्ती की जा रही है, उनमें बिना अनुमति देश में प्रवेश, वीजा नियमों का उल्लंघन, धोखाधड़ी और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं शामिल हैं।
3 लाख से ज्यादा वीजा रद्द
ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति का असर केवल नए वीजा आवेदनों तक सीमित नहीं है। रॉयटर्स की 20 अक्टूबर, 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अब तक 3 लाख से ज्यादा अमेरिकी वीजा रद्द किए जा चुके हैं।
अमेरिकी प्रशासन ने इसकी वजह कानून तोड़ने, धोखाधड़ी करने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ सख्त रुख बताया है। साथ ही, वीजा आवेदकों की जांच और उनके सोशल मीडिया अकाउंट की पड़ताल पर भी ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड पर भी कसा शिकंजा?
भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए सबसे बड़ी चिंता H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया को लेकर है। H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की सुविधा देता है। भारत के बड़ी संख्या में टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स इस रास्ते से अमेरिका में काम करते हैं।
ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियां H-1B और रोजगार आधारित इमिग्रेशन व्यवस्था का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए कर रही हैं। प्रशासन का कहना है कि इससे अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियों और वेतन पर दबाव पड़ सकता है।
इसी कड़ी में 8 अक्टूबर को अमेरिका ने 8 बड़ी टेक्नोलॉजी और IT कंपनियों के लिए PERM कार्यक्रम के तहत नई अर्जियां स्वीकार करने और लंबित अर्जियों की प्रोसेसिंग रोकने की घोषणा की थी। इस सूची में Microsoft, Adobe, Cognizant, Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Wipro, HCL Technologies और Capgemini शामिल हैं।
PERM यानी Permanent Labor Certification रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का अहम चरण है। इसका इस्तेमाल कंपनियां पात्र विदेशी कर्मचारियों की स्थायी रेजिडेंसी को प्रायोजित करने के लिए करती हैं।
रुबियो का बयान भारत के लिए क्या मायने रखता है?
रुबियो का बयान ऐसे समय आया है, जब भारत और अमेरिका अपने व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को भी बेहद करीब बताया है और कहा है कि करीब 99% काम पूरा हो चुका है। उनके अनुसार, समझौते को अंतिम रूप देने में महीनों के बजाय कुछ हफ्ते लग सकते हैं।
वीजा नियमों पर उनका आश्वासन भारत के लिए कूटनीतिक रूप से अहम है, लेकिन इसे अमेरिकी इमिग्रेशन नीति में तत्काल राहत का संकेत नहीं माना जा सकता। रुबियो ने नियमों में सख्ती हटाने या भारतीय आवेदकों के लिए कोई विशेष छूट देने की घोषणा नहीं की है।
