UPI Payment : यूपीआई से लेन-देन (UPI Transaction) 1 अप्रैल 2023 से महंगा होने वाला है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) पेमेंट को लेकर एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें अप्रैल से PPI के जरिए यूपीआई से होने वाले मर्चेंट पेमेंट पर इंटरचेंज चार्ज लगाने की सिफारिश की गई है।
UPI Payment Extra Charge: मर्चेंट पेमेंट पर PPI चार्ज लग सकता है।
कस्टमर से किसी का तरह नहीं लिया जाएगा चार्ज
NPCI के मुताबिक इंटरचेंज चार्ज केवल PPI मर्चेंट ट्रंजैक्शन पर लागू होंगे। इसमें कस्टमर से किसी तरह का चार्ज नहीं लिया जाएगा। NPCI ने कहा है कि इससे बैंक अकाउंट से बैंक अकाउंट में यूपीआई से पेमेंट करने पर किसी भी तरह का चार्ज नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा पेटीएम के मालिक विजय शेखर शर्मा ने स्पष्ट किया है कि बैंक अकाउंट या वॉलेट से UPI पेमेंट्स करना पूरी तरह से फ्री है। ग्राहकों के लिए UPI से पेमेंट करने का चार्ज कुछ भी नहीं है और लोगों को किसी भी तरह के अफवाह से बचने की सलाह दी है।
UPI payments from Bank account or Wallets are totally free ! #UPIcharges are NIL for consumers. Do not fall for ma… t.co/cfYq7QbW8I
— ANI (@ANI) Mar 29, 2023
इतना लग सकता है एक्स्ट्रा चार्ज
ईटी की खबर के मुताबिक, सर्कुलर में NPCI ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट यानि PPI से होने वाले 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर इंटरचेंज चार्ज लगाने को कहा है। ये चार्ज 0.5-1.1 फीसदी तक लगाया जा सकता है। यह चार्ज सभी तरह के मर्चेंट पेमेंट पर लिया जाएगा। हालांकि पर्सन टू पर्सन या फिर पर्सन टू मर्चेंट पेमेंट पर इंटरचेंज चार्ज नहीं लगाया जाएगा। ऐसे में आम उपभोक्ता को रोजमर्रा के लेन-देन पर इसका असर नहीं होगा।
2000 रुपये तक के ट्रैजैक्शन हो रहे ज्यादा
NPCI के सर्कुलर के मुताबिक 1 अप्रैल से UPI पेमेंट जैसे फोन पे (Phone Pay), गूगल पे (Google Pay) और पेटीएम (Paytm) जैसे डिजिटल माध्यम से अगर आप 2,000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट करेंगे, तो इसके लिए ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 70 फीसदी UPI P2M लेन-देन 2,000 रुपये से अधिक के कीमत के होते हैं, ऐसे में इन पर 0.5 से 1.1 फीसदी का इंटरचेंज चार्ज लगाने की तैयारी चल रही है।
क्या है इंटरचेंज फीस
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन (NPCI) ने अलग-अलग क्षेत्र के लिए अलग-अलग इंटरचेंज फीस तय की है। कृषि और टेलीकॉम सेक्टर में सबसे कम इंटरचेंज फीस वसूली जाएगी। दरअसल, इंटरचेज फीस मर्चेंट ट्रांजैक्शंस यानी मर्चेंट टू मर्चेंट पेमेंट करने वाले यूजर्स को ही देना पड़ता है।
