कितने नंबर तक वेटिंग टिकट कन्फर्म हो जाती है? बुकिंग से पहले जान लें सीक्रेट

ट्रेन टिकट बुक करते समय वेटिंग लिस्ट (Waiting List) सबसे बड़ी सिरदर्दी होती है। अक्सर यात्री इस उलझन में रहते हैं कि उनका टिकट कन्फर्म होगा या नहीं। रेलवे के खास 'कन्फर्मेशन फॉर्मूले' से आपको कंफर्म टिकट मिल सकती है।

Indian Railway में सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती 'कन्फर्म टिकट' पाना है। अक्सर त्योहारों या छुट्टियों के दौरान ट्रेनें फुल हो जाती हैं और यात्रियों को वेटिंग लिस्ट (Waiting Tickets ) का सामना करना पड़ता है। बुकिंग करते समय जब हमें 50, 100 या 200 वेटिंग नंबर दिखता है, तो मन में सबसे पहला सवाल यही आता है "क्या यह टिकट कन्फर्म होगा?" रेलवे के पास टिकट कन्फर्मेशन का एक खास फॉर्मूला और डेटा होता है, जिसे समझकर आप अपनी यात्रा की योजना बेहतर तरीके से बना सकते हैं।

Indian Railway Ticket

कितने नंबर तक रहती है कन्फर्म होने की उम्मीद?

आम तौर पर यात्रियों को लगता है कि अगर वेटिंग नंबर कम है, तो टिकट जल्दी कन्फर्म होगा। लेकिन रेलवे के जानकारों और ऐतिहासिक डेटा के अनुसार, यह सिर्फ नंबर पर नहीं बल्कि 'ट्रेन के प्रकार' और 'कोटा' पर निर्भर करता है। स्लीपर क्लास (Sleeper Class) में अक्सर 100 से 150 तक की वेटिंग कन्फर्म होने की संभावना रहती है, क्योंकि इसमें सीटों की संख्या ज्यादा होती है और कैंसिल होने की दर भी अधिक रहती है। वहीं, थर्ड एसी (3AC) में 50 से 80 तक की वेटिंग कन्फर्म हो सकती है। लेकिन फर्स्ट एसी (1AC) या एग्जीक्यूटिव क्लास में अगर वेटिंग 5 या 10 भी है, तो उसके कन्फर्म होने के चांस बहुत कम होते हैं क्योंकि वहां सीटें कम होती हैं।

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