Unclaimed Shares AI Rule: 89,000 करोड़ का लावारिस पैसा लौटाने के लिए सरकार का 'मास्टरप्लान', अब AI करेगा शेयर्स का ट्रांसफर

सरकार बिना दावे वाले शेयरों और डिविडेंड के निपटारे के लिए एक नया डिजिटल सिस्टम लाने की योजना बना रही है। यह नया सिस्टम एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) का इस्तेमाल करके अलग-अलग सरकारी प्लेटफॉर्म को आपस में जोड़ेगा।

शेयर बाजार, बैंक खातों, ईपीएफ (EPF), इंश्योरेंस पॉलिसियों और म्यूचुअल फंड्स में पड़ा लगभग 89,000 करोड़ रुपये से अधिक का लावारिस पैसा उनके वास्तविक हकदारों या कानूनी वारिसों तक पहुँचाने के लिए भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक 'मास्टरप्लान' तैयार किया है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के तहत काम करने वाली 'इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी' (IEPFA) लावारिस शेयरों और डिविडेंड के ट्रांसफर की सुस्त और पेचीदा कागजी प्रक्रिया को खत्म कर एक पूरी तरह से डिजिटल, सहमति-आधारित (consent-based) और पेपरलेस सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। इस नए सिस्टम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स को रीढ़ की हड्डी बनाया जा रहा है, ताकि दावों का निपटारा बेहद तेज़ गति से और पारदर्शी तरीके से किया जा सके।

Unclaimed Money

कब लावारिस माना जाता है शेयर?

वर्तमान व्यवस्था में यदि किसी शेयर, डिविडेंड या डिबेंचर का लगातार सात वर्षों तक कोई दावा नहीं किया जाता, तो कंपनियां उस संपत्ति को IEPFA को स्थानांतरित कर देती हैं। लेकिन मौजूदा क्लेम पोर्टल पर निवेशकों को कई हितधारकों के चक्कर काटने पड़ते हैं और एक ही दस्तावेज़ को बार-बार जमा करना पड़ता है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार एक नया एकीकृत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म विकसित कर रही है, जो एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) के ज़रिए IEPFA को MCA21 पोर्टल, डिपॉजिटरीज़ (NSDL/CDSL), रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट्स (RTAs), बैंकों, डिजिलॉकर और आधार ऑथेंटिकेशन जैसे आधिकारिक ढांचों से सीधे जोड़ देगा। इससे निवेशकों को वे दस्तावेज़ या जानकारी दोबारा नहीं देनी पड़ेगी जो पहले से ही सरकारी या रेगुलेटेड संस्थाओं के पास उपलब्ध हैं; सिस्टम दावेदार की अनुमति से डेटा को खुद-ब-खुद वेरिफाई कर लेगा।

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