Crude Oil Prices Jumps : कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर आग लगी है। गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को Brent Crude का भाव पांच महीने शीर्ष पर पहुंच गया है। मई 2026 के बाद पहली बार क्रूड का भाव 112 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हुआ है। गुरुवार को भारतीय समय के मुताबिक दोपहर बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत $112 प्रति बैरल के पार पहुंच गई।
दुनिया के साथ ही इससे भारत की चिंता बढ़ना लाजिमी है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। Hormuz Strait से क्रूड और गैस की सप्लाई पहले ही ठप है। अब सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष बढ़ने की वजह से बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट में भी सुरक्षा जोखिम बढ़ने से ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर दबाव की आशंका है।
22 अक्टूबर को भारतीय समयानुसार दोपहर 3:16 बजे ब्रेंट क्रूड $112.51 प्रति बैरल के डे-हाई पर पहुंच गया था। उस समय इसमें $3.53 यानी 3.24% की तेजी दर्ज की गई। क्रूड की कीमतों में तेजी कितनी तेज है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले एक महीने में ब्रेंट क्रूड 13.22% और साल की शुरुआत से अब तक 84.71% चढ़ चुका है।
एक साल में 79% उछला भाव
ब्रेंट क्रूड के प्रदर्शन पर नजर डालें तो तेजी सिर्फ एक-दो दिन की नहीं है। बीते एक हफ्ते में इसकी कीमत 6.09% बढ़ी है, जबकि पिछले 3 महीनों में 19.46% का उछाल आया है। एक साल के दौरान कीमत में 79.54% की बढ़ोतरी हुई है। 22 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड का डे-रेंज $109.89 से $112.51 प्रति बैरल रहा। इसका 52 सप्ताह का उच्च स्तर $115.25 प्रति बैरल है।
होर्मुज के बाद बाब-अल-मंडेब क्यों अहम?
होर्मुज से ग्लोबल बाजार तक कच्चे तेल की सप्लाई के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ता है। इसके बाद बाब-अल-मंडेब लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच स्थित एक रणनीतिक समुद्री मार्ग है। यहां व्यवधान आने पर लाल सागर और स्वेज नहर के रास्ते एशिया-यूरोप के बीच होने वाले व्यापार पर असर पड़ सकता है।
S&P Global के मुताबिक, बाब-अल-मंडेब में सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण बड़े तेल टैंकरों ने इस रास्ते से दूरी बनाई है। इससे जहाजों को लंबे वैकल्पिक रास्तों से भेजने की जरूरत पड़ सकती है, जिससे माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ सकती है।
भारतीय क्रूड बास्केट भी $116 के पार
भारत के लिए चिंता सिर्फ ब्रेंट क्रूड की कीमतों तक सीमित नहीं है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक, 21 अक्टूबर 2026 को भारतीय क्रूड ऑयल बास्केट की कीमत $116.73 प्रति बैरल थी।
PPAC के आंकड़ों में अक्टूबर 2026 के लिए भारतीय क्रूड बास्केट का औसत $120.09 प्रति बैरल दिखाया गया है। यह चालू महीने का औसत है, जबकि 21 अक्टूबर का $116.73 का आंकड़ा एक खास दिन की कीमत है। दोनों आंकड़ों की तुलना करते समय इस अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
भारत पर दोहरी मार क्यों?
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत के लिए कई मोर्चों पर मुश्किल पैदा कर सकती है। महंगा तेल खरीदने के लिए भारत को ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ सकती है। इससे व्यापार घाटा बढ़ने का जोखिम रहता है। इसकी वजह से डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया और कमजोर हो जाता है, जिससे क्रूड खरीदना और महंगा होता जाता है।
क्या पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे?
क्रूड की कीमतों में तेजी का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम तुरंत बढ़ जाएंगे। घरेलू कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के अलावा रुपये-डॉलर की एक्सचेंज रेट, तेल कंपनियों की लागत और मूल्य निर्धारण के फैसलों का असर भी पड़ता है। लेकिन अगर कच्चा तेल लंबे समय तक महंगा बना रहता है, तो तेल कंपनियों की लागत और मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
