इंस्टाग्राम, यूट्यूब, X (ट्विटर), फेसबुक और लिंक्डइन जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर एक्टिव कंटेंट क्रिएटर्स की कमाई अब केवल एक शौक नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित बिजनेस बन चुकी है। ब्रांड प्रमोशन, स्पॉन्सर्ड पोस्ट्स, डिजिटल प्रोडक्ट्स और ऐड रेवेन्यू से होने वाली कमाई पर सही तरीके से टैक्स चुकाना कानूनन जरूरी है। एसेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए टैक्स नियमों को समझना और समय पर अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना हर इंफ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
यूट्यूब और इंस्टाग्राम की कमाई पर कितना लगेगा टैक्स? समझिए TDS, GST और ITR के पूरे कायदे (तस्वीर- AI)
सोशल मीडिया से होने वाली कमाई के मुख्य जरिया
कंटेंट क्रिएटर्स डिजिटल दुनिया में कई तरह से कमाई करते हैं। इसमें मुख्य रूप से यूट्यूब और अन्य सोशल ऐप्स से मिलने वाला विज्ञापन राजस्व, ब्रांड्स के साथ कोलैबोरेशन और स्पॉन्सर्ड पोस्ट्स, एफिलिएट मार्केटिंग से मिलने वाला कमीशन, फैन्स द्वारा दिए गए सुपर चैट्स और मेंबरशिप तथा मर्चेंडाइज या डिजिटल प्रोडक्ट्स की बिक्री से होने वाली आय शामिल है।
क्रिएटर्स की आय को कैसे देखा जाता है टैक्स कानून में?
इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से कंटेंट क्रिएशन का काम कर रहा है, तो उसकी कमाई को 'बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाले लाभ' के तहत रखा जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि क्रिएटर अपनी कौशल और बौद्धिक क्षमता का उपयोग करके एक सेल्फ-एम्प्लॉयड व्यक्ति के रूप में काम कर रहा होता है। हालांकि, अगर यह गतिविधि कभी-कभार की जाती है और मुख्य आय का जरिया नहीं है, तो इसे 'अन्य स्रोतों से आय' के अंतर्गत माना जा सकता है।
TDS और GST के क्या हैं नियम?
कंटेंट क्रिएटर्स पर TDS और GST दोनों के नियम लागू होते हैं। अगर किसी ब्रांड या कंपनी से एक वित्तीय वर्ष में 30,000 रुपये से अधिक की प्रोफेशनल फीस मिलती है, तो 10 प्रतिशत की दर से TDS काटा जाता है। इसके अलावा, धारा 194R के तहत अगर क्रिएटर को काम के सिलसिले में 20,000 रुपये से अधिक मूल्य के मुफ्त उत्पाद (Free Products) या अन्य लाभ/सुविधाएं मिलती हैं, तो उस पर भी TDS का प्रावधान लागू होता है। अगर किसी क्रिएटर का सालाना टर्नओवर 20 लाख रुपये (विशेष राज्यों के लिए 10 लाख रुपये) से अधिक हो जाता है, तो GST रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो जाता है। भारत के बाहर के ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं को निर्धारित शर्तों के तहत 'निर्यात' (Export of Services) माना जा सकता है।
प्रिजम्पटिव टैक्स स्कीम (धारा 44AD) का लाभ
बिजनेस के रूप में काम कर रहे योग्य क्रिएटर्स धारा 44AD के तहत प्रिजम्पटिव टैक्स स्कीम चुन सकते हैं। इसके तहत क्रिएटर अपनी कुल डिजिटल प्राप्तियों का केवल 6 प्रतिशत (और गैर-डिजिटल प्राप्तियों का 8 प्रतिशत) ही कर योग्य लाभ के रूप में दिखा सकते हैं। यह योजना उन लोगों के लिए उपलब्ध है जिनका सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रुपये तक है (या कैश लेनदेन 5 प्रतिशत से कम होने पर 3 करोड़ रुपये तक)। हालांकि, एक बार इस स्कीम से बाहर निकलने पर अगले 5 वर्षों तक इसका दोबारा लाभ नहीं उठाया जा सकता।
ITR फॉर्म और 31 अगस्त की अंतिम सीमा
वित्तीय वर्ष 2025-26 (AY 2026-27) के लिए, ऐसे सभी टैक्सपेयर्स जिनके खातों का टैक्स ऑडिट होना जरूरी नहीं है और जो ITR-3 या ITR-4 दाखिल करते हैं, उनके लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 है। प्रिजम्पटिव टैक्स (धारा 44AD) चुनने वाले पात्र क्रिएटर्स साधारणत ITR-4 भर सकते हैं, जबकि अन्य क्रिएटर्स को ITR-3 दाखिल करना होता है। जिन क्रिएटर्स के खातों का ऑडिट होना अनिवार्य है, उनके लिए अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 तय की गई है। अगर आप 31 अगस्त की समय सीमा चूक जाते हैं, तो आप लेट फीस (अधिकतम 5,000 रुपये) और बकाए टैक्स पर ब्याज देकर बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। कानूनी कार्रवाई और वित्तीय दंड से बचने के लिए समय पर रिटर्न दाखिल करना ही समझदारी है।
