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Tata Trusts बनाएगा 50 हॉस्पिटल, अमीर मरीजों की फीस से गरीबों का होगा इलाज

देश के सबसे बड़े आद्यौगिक समूह टाटा ग्रुप को कंट्रोल करने वाले टाटा ट्रस्ट्स ने देश में 50 जनरल हॉस्पिटल बनाने का ऐलान किया है। ये सभी नॉन प्रॉफिट हॉस्पिटल होंगे।

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टाटा ट्रस्ट के सभी हॉस्पिटल नॉन-प्रॉफिट होंगे।

देश में सस्ते और बेहतर इलाज की सुविधा बढ़ाने के लिए Tata Trusts बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने (Noel Tata) ने देशभर में 40 से 50 नॉन-प्रॉफिट जनरल हॉस्पिटल का नेटवर्क तैयार करने का ऐलान किया है। PTI की एक रिपोर्ट के मुताबिक टाटा ट्रस्ट्स की FY2025-26 की सालाना रिपोर्ट में नॉन-प्रॉफिट जनरल हॉस्पिटल नेटवर्क नेटवर्क तैयार करने की बात कही गई है।

रिपार्ट के मुताबिक इन अस्पतालों का मॉडल ऐसा होगा, जिसमें इलाज का खर्च उठाने में सक्षम मरीजों से मिलने वाली फीस के जरिए उन लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। हालांकि, अभी अस्पतालों के निर्माण पर होने वाला कुल निवेश, उनकी लोकेशन और निर्माण की समयसीमा का खुलासा नहीं किया गया है।

गरीबों के इलाज के लिए क्या है टाटा का प्लान?

नोएल टाटा के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स का लक्ष्य केवल सामाजिक कार्यों पर पैसा खर्च करना नहीं, बल्कि ऐसी संस्थाएं तैयार करना है, जो लंबे समय तक लोगों को फायदा पहुंचा सकें। अस्पतालों की प्रस्तावित व्यवस्था में भुगतान करने वाले मरीजों से मिलने वाले रेवेन्यू का इस्तेमाल आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के इलाज को सुलभ बनाने के लिए किया जाएगा।

5 साल में 25 लाख लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य

टाटा ट्रस्ट्स ने 2026 से 2031 के लिए पांच साल की हेल्थकेयर रणनीति तैयार की है। इसके तहत करीब 75 ब्लॉक में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने और 35 प्राथमिकता वाले जिलों में 100 से अधिक सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने का लक्ष्य है।

इस रणनीति के तहत लगभग 25 लाख लोगों तक पहुंचने, 10 लाख बुजुर्गों को प्राइमरी हेल्थकेयर से जोड़ने और 20,000 से अधिक फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स के कौशल को बेहतर बनाने की योजना है। संस्था ने अपने हस्तक्षेप वाले क्षेत्रों में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को प्रति 1,000 जीवित जन्म पर 32 से घटाकर 25 करने का लक्ष्य भी रखा है।

कैंसर के इलाज पर भी रहेगा फोकस

टाटा ट्रस्ट्स कैंसर के इलाज को मरीजों के घरों के नजदीक पहुंचाने वाले मॉडल का भी विस्तार करना चाहती है। इसका उद्देश्य मरीजों और उनके परिवारों को इलाज के लिए दूर-दराज के शहरों तक जाने की परेशानी कम करने में मदद करना है।

Annual Report के मुताबिक, FY2025-26 में टाटा ट्रस्ट्स के कैंसर केयर प्रोग्राम के तहत 1,06,626 आउटपेशेंट कंसल्टेशन हुए। इस दौरान 24,874 कीमोथेरेपी साइकिल पूरी की गईं और 2,879 सर्जरी की गईं। इसके अलावा, 29,638 मरीजों को रेडियोथेरेपी दी गई।

FY26 में ₹1,556 करोड़ से ज्यादा खर्च

टाटा ट्रस्ट्स ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने परोपकारी कार्यों के लिए कुल ₹1,556.31 करोड़ वितरित किए। इसमें सबसे ज्यादा ₹457.62 करोड़ ग्रामीण विकास पर खर्च किए गए। शिक्षा के लिए ₹270.26 करोड़ और कैंसर केयर के लिए ₹178.46 करोड़ आवंटित किए गए। नोएल टाटा ने कहा कि किसी संस्था की सफलता को केवल इस आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए कि उसने कितना पैसा खर्च किया या कितने लोगों तक पहुंच बनाई।

स्थायी संस्थान बनाने की तैयारी

नोएल टाटा ने भारतीय युवाओं के लिए देश में ही बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) और टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल जैसे संस्थानों का उदाहरण देते हुए कहा कि देश को ऐसी संस्थाओं की जरूरत है, जो आने वाली पीढ़ियों तक लोगों की सेवा कर सकें।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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