सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मकान मालिक की मंजूरी के बिना बैंक विलय होने पर भी नहीं मिलेगी बेदखली से राहत

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मकान मालिक की लिखित अनुमति बिना बैंक विलय होने पर नया बैंक बेदखली से नहीं बच सकता। पीएनबी को कनॉट सर्कस स्थित परिसर 31 जनवरी 2027 तक खाली करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि अगर किसी किरायेदार बैंक का दूसरे बैंक में विलय (Bank Merger) हो जाता है, तब भी उसे मकान मालिक की लिखित अनुमति लेना जरूरी होगा। अगर ऐसी अनुमति नहीं ली गई है, तो नया बैंक दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत बेदखली (Eviction) से बच नहीं सकता। कोर्ट ने कहा कि बैंकों का विलय चाहे सरकारी योजना के तहत ही क्यों न हुआ हो, इससे मकान मालिक के अधिकार खत्म नहीं हो जाते। यह फैसला दिल्ली के कनॉट सर्कस स्थित एक व्यावसायिक संपत्ति से जुड़े करीब 40 साल पुराने विवाद में सुनाया गया है।

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मकान मालिक के अधिकार सर्वोपरि! सुप्रीम कोर्ट ने PNB को दिया बड़ा झटका (तस्वीर- AI Image)

पीएनबी को 31 जनवरी 2027 तक खाली करना होगा परिसर

न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति के. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) को निर्देश दिया कि वह कनॉट सर्कस स्थित किराये के परिसर को 31 जनवरी 2027 तक शांतिपूर्वक खाली करके उसके मालिक ब्रिटिश मोटर कार कंपनी लिमिटेड को सौंप दे। कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय से चल रहे इस विवाद का अब अंतिम समाधान होना चाहिए और कानून के अनुसार मकान मालिक को उसका अधिकार मिलना चाहिए।

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