भारत के निर्यात में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। पेट्रोलियम उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक सामान और रसायनों की विदेशों में बढ़ती मांग के दम पर अगस्त में देश का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 23.04 प्रतिशत बढ़कर 44.4 अरब डॉलर पहुंच गया। हालांकि, दूसरी ओर कच्चे तेल के महंगे आयात के कारण व्यापार संतुलन पर दबाव बना हुआ है। सितंबर में आयात बढ़ने से व्यापार घाटा भी अगस्त के मुकाबले बढ़ गया।
सितंबर में 30.21 अरब डॉलर रहा व्यापार घाटा
PTI/भाषा के मुताबिक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में भारत का व्यापार घाटा सालाना आधार पर घटकर 30.21 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 33 अरब डॉलर था। हालांकि, अगस्त 2026 के 26.86 अरब डॉलर के मुकाबले सितंबर में व्यापार घाटा बढ़ गया। सितंबर में देश का कुल आयात सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़कर 74.61 अरब डॉलर पहुंच गया।
सोने-चांदी का आयात घटा, कच्चे तेल की खरीद बढ़ी
सितंबर में कीमती धातुओं के आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सोने का आयात 81.27 प्रतिशत घटकर 1.8 अरब डॉलर और चांदी का आयात 49.11 प्रतिशत गिरकर 66.5 करोड़ डॉलर रह गया। इसके उलट, कच्चे तेल का आयात 30.76 प्रतिशत बढ़कर 18.34 अरब डॉलर पहुंच गया। पिछले कुछ सप्ताह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है। तेल की ऊंची कीमतों से भारत के आयात बिल पर दबाव बढ़ रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक सामान और पेट्रोलियम उत्पादों की मांग बढ़ी
सितंबर में पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात 31.9 प्रतिशत बढ़कर 6.2 अरब डॉलर रहा। इलेक्ट्रॉनिक सामान के निर्यात में 70.44 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि हुई और यह 5.3 अरब डॉलर पहुंच गया। वहीं, रसायनों का निर्यात 24.21 प्रतिशत बढ़कर 3 अरब डॉलर रहा। पश्चिम एशिया संकट के बीच कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारतीय पेट्रोलियम उत्पादों को बेहतर कीमतें मिलने का फायदा भी निर्यातकों को मिला।
पहली छमाही में बढ़ा व्यापार घाटा
चालू वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से सितंबर के दौरान भारत का कुल निर्यात 18.51 प्रतिशत बढ़कर 259.89 अरब डॉलर रहा। इस अवधि में आयात 16.31 प्रतिशत बढ़कर 437.53 अरब डॉलर पहुंच गया। इससे व्यापार घाटा बढ़कर 177.64 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 156.88 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने उम्मीद जताई कि निर्यात में वृद्धि का रुख बना रहा, तो पूरे वित्त वर्ष में वस्तु निर्यात 500 अरब डॉलर के पार पहुंच सकता है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह 442 अरब डॉलर रहा था। निर्यातकों के संगठन फियो के अध्यक्ष एससी रल्हन के मुताबिक, वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद इंजीनियरिंग, रसायन, कृषि और तकनीक आधारित उत्पादों का निर्यात बढ़ रहा है।
