आगामी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की दिशा कई प्रमुख कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें सबसे महत्वपूर्ण हैं—कंपनियों के मार्च तिमाही के वित्तीय परिणाम, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का निवेश व्यवहार और वैश्विक बाजारों का रुझान। विशेषज्ञों का मानना है कि इन तीनों घटकों की गतिविधियों पर निवेशकों की पैनी नजर बनी रहेगी।
अगले सप्ताह के लिए शेयर बाजार।
मास्टर ट्रस्ट ग्रुप के निदेशक पुनीत सिंघानिया ने कहा कि भारत-पाक तनाव कम होने और अन्य प्रमुख भू-राजनीतिक जोखिमों के पीछे हटने से अब निवेशकों का ध्यान कंपनियों के तिमाही प्रदर्शन पर केंद्रित हो गया है। इसके साथ ही भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते की खबरें भी बाजार की धारणा को सहारा दे सकती हैं।
सिंघानिया के अनुसार, देश के भीतर के घटनाक्रम के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक संकेत और व्यापार समझौते से जुड़ी खबरें भी बाजार की चाल को प्रभावित करेंगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, भारत अमेरिकी वस्तुओं पर शुल्क में कटौती करने को तैयार है और दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता जल्द हो सकता है।
इन कंपनियों के आएंगे तिमाही नतीजे
इस सप्ताह पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, सन फार्मा, आईटीसी, और जेएसडब्ल्यू स्टील जैसी प्रमुख कंपनियां अपने नतीजे पेश करेंगी। रेलिगेयर ब्रोकिंग के रिसर्च प्रमुख अजित मिश्रा के अनुसार, जब तक कोई बड़ा वैश्विक या घरेलू समाचार नहीं आता, तब तक बाजार की चाल पूरी तरह इन कंपनियों के प्रदर्शन पर निर्भर रहेगी।
एफआईआई के निवेश से मिल सकता है समर्थन
विशेषज्ञों का कहना है कि एफआईआई की खरीदारी में आई तेजी बाजार को मजबूत सहारा दे सकती है। जहां जनवरी से मार्च तक एफआईआई ने लगभग ₹1.16 लाख करोड़ की बिकवाली की थी, वहीं अप्रैल में उन्होंने पुनः बाजार में रुचि दिखाई और मई के मध्य तक ₹23,778 करोड़ की भारी खरीदारी की है।
बाजार में हालिया प्रदर्शन
पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स में 2,876.12 अंकों (3.61%) की वृद्धि दर्ज की गई, वहीं एनएसई निफ्टी में 1,011.8 अंकों (4.21%) की बढ़त रही। जियोजीत इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के मुख्य रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने बताया कि अमेरिका-चीन व्यापार विवाद में नरमी और भारत-पाक तनाव के खत्म होने से वैश्विक निवेश माहौल भी सकारात्मक होता दिख रहा है, जो भारतीय बाजारों के लिए शुभ संकेत है।
