अमेरिकी डॉलर के सामने रुपये में मजबूती का सिलसिला जारी है। बुधवार को भारतीय अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 46 पैसे मजबूत होकर 94.45 (अस्थायी ) प्रति डॉलर पर बंद हुआ। बुधवार को रुपया 29 पैसे मजबूत होकर 94.62 प्रति डॉलर पर खुला था। अमेरिकी डॉलर की मांग पर अंकुश लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के हस्तक्षेप से रुपये को समर्थन मिला है।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, बुधवार को सार्वजनिक अभिदान के लिए खुले जियो के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) से जुड़े विदेशी डॉलर प्रवाह से भी रुपये को समर्थन मिला। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी डॉलर में मजबूती ने रुपये की बढ़त को सीमित किया।
मंगलवार को करेंसी मार्केट बंद था
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया मजबूत होकर 94.78 प्रति डॉलर पर खुला। इसके बाद और मजबूत होकर 94.62 प्रति डॉलर पर पहुंच गया जो पिछले बंद भाव से 29 पैसे की बढ़त है। रुपया सोमवार को दो पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दो 94.91 पर बंद हुआ था। दशहरा के कारण मंगलवार को विदेशी मुद्रा बाजार बंद था।
डॉलर इंडेक्स में मामूली तेजी
इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक मामूली 0.06 प्रतिशत बढ़कर 101.58 पर आ गया। घरेलू शेयर बाजार में सेंसेक्स 665.10 अंक चढ़कर 74,518 अंक पर जबकि निफ्टी 188.40 अंक की बढ़त के साथ 23,077.35 अंक पर रहा। अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट कच्चा तेल का भाव वायदा कारोबार में 1.42 प्रतिशत बढ़कर 110.33 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सोमवार को शुद्ध रूप से 1,148.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।
डॉलर तीन सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचा
रुपये में मजबूती से अमेरिकी डॉलर तीन सप्ताह के निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशक सतर्क हैं। वहीं, भारतीय रुपये में लगातार नौवें कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई।
हालांकि, महंगा कच्चा तेल रुपये के लिए चिंता बना हुआ है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतें बढ़ने से डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड 1.5% चढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। दूसरी ओर, चीन की अर्थव्यवस्था में तीसरी तिमाही के दौरान सालाना आधार पर 4.5% की वृद्धि से युआन को समर्थन मिला। जापानी येन 158 प्रति डॉलर के आसपास स्थिर रहा, जबकि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तीन सप्ताह के उच्च स्तर के करीब पहुंच गया।
अब निवेशकों की नजर 28 से 30 अक्टूबर के बीच होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व, यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान की मौद्रिक नीति बैठकों पर है। इन बैंकों के फैसलों का असर डॉलर, एशियाई मुद्राओं और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।
