रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट Vs पारंपरिक प्रॉपर्टी: REIT निवेशकों के लिए क्यों बन रहे हैं बेहतर विकल्प

REIT Vs Physical Real Estate: भारत में REIT तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। REITs निवेशकों को बेहतर लिक्विडिटी, कम जोखिम, प्रोफेशनल मैनेजमेंट और आसान निवेश सुविधा देकर पारंपरिक प्रॉपर्टी निवेश का मजबूत विकल्प बन रहे हैं।

REIT Vs Physical Real Estate : आज के समय में REIT (रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट) पारंपरिक प्रॉपर्टी निवेश की तुलना में ज्यादा आसान, पारदर्शी और सुविधाजनक विकल्प बनकर उभर रहे हैं। REIT और फिजिकल रियल एस्टेट में जमीन-आसमान का फर्क है। अब कई निवेशक सीधे मकान, दुकान या ऑफिस खरीदने के बजाय REITs में निवेश करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं, क्योंकि इसमें झंझट कम और सुविधा ज्यादा है।

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रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट Vs पारंपरिक प्रॉपर्टी (तस्वीर-istock)

REITs में सबसे बड़ा फायदा है लिक्विडिटी

REITs का सबसे बड़ा फायदा इसकी लिक्विडिटी यानी तुरंत खरीद-बिक्री की सुविधा है। REITs के यूनिट्स शेयर बाजार में आसानी से खरीदे और बेचे जा सकते हैं। वहीं अगर कोई व्यक्ति फिजिकल प्रॉपर्टी खरीदता है तो उसे बेचने में कई महीने लग सकते हैं। इसके अलावा प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने की प्रक्रिया में कानूनी कागजात, रजिस्ट्रेशन और ब्रोकर जैसी कई परेशानियां भी होती हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक REITs में निवेशक छोटी रकम से भी शुरुआत कर सकते हैं। कोई भी व्यक्ति सिर्फ एक यूनिट खरीदकर निवेश शुरू कर सकता है, जबकि फिजिकल प्रॉपर्टी खरीदने के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत होती है।

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