RBI Monetary Policy:फिर नहीं मिली EMI पर राहत,RBI ने लगातार 7 वीं बार रेपो रेट में नहीं किया बदलाव, जानें क्यों

RBI Monetary Policy: आर्थिक वृद्धि दर को लेकर चिंताएं कम होने से रिटेल महंगाई ही इस समय आरबीआई के फोकस पर है। खास तौर से जिस तरह ग्लोबल लेवल पर जापान, जर्मनी जैसी प्रमुख इकोनॉमी आर्थिक मंदी की चपेट में हैं, उसे देखते हुए आरबीआई महंगाई को लेकर बेहद सतर्कता अपना रहा है।

RBI Monetary Policy:भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बार फिर ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। और उसे रेपो रेट को 6.5 फीसदी पर बरकरार रखा है। इसका मतलब यह है कि आपको EMI पर कोई राहत नहीं मिलने वाली है। हालांकि अच्छी बात यह है कि कर्ज महंगा नहीं होगा। लगातार सातवीं बार ब्याज दरों में बदलाव नहीं होने की प्रमुख वजह आरबीआई की देखो और इंतजार करो की नीति है। असल में आरबीआई अमेरिकी फेड रिजर्व और दुनिया के प्रमुख रेग्युलेटर के कदम पर नजर रखे हुए है। वहीं घरेलू स्तर पर अभी महंगाई दर आरबीआई के सामान्य स्तर (4 फीसदी) के दायरे में नहीं आई है। इसकी प्रमुख वजह खाने-पीने की चीजों के दाम अभी भी ज्यादा हैं। फरवरी में रिटेल महंगाई दर 5.09 फीसदी और खाद्य महंगाई दर 8.66 फीसदी रही है।

RBI MPC MEETING

आरबीआई ने फिर रेपो रेट में नहीं किया बदलाव

ग्रोथ ट्रैक होने से महंगाई पर ज्यादा फोकस

आर्थिक वृद्धि दर को लेकर चिंताएं कम होने से रिटेल महंगाई ही इस समय आरबीआई के फोकस पर है। खास तौर से जिस तरह ग्लोबल लेवल पर जापान, जर्मनी जैसी प्रमुख इकोनॉमी आर्थिक मंदी की चपेट में हैं, उसे देखते हुए आरबीआई महंगाई को लेकर बेहद सतर्कता अपना रहा है। अभी महंगाई दर 5 फीसदी की रेंज में हैं। जबकि आरबीआई इसे 4 फीसदी के रेंज में लाना चाहता है। खास तौर से खाद्य महंगाई दर आरबीआई के लिए चिंता का विषय है। फरवरी में रिटेल महंगाई दर 5.09 फीसदी और खाद्य महंगाई दर 8.66 फीसदी रही है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने चालू वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के वृद्धि दर के अनुमान को संशोधित कर क्रमशः 8.2 और 8.1 प्रतिशत कर दिया है। पिछले वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही में वृद्धि दर 8.4 प्रतिशत रही थी।

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