कम बारिश से रबी फसलों की बुवाई सुस्त, गेहूं से लेकर दलहन-तिलहन तक का रकबा घटा

देश में इस बार अल नीनो के चलते मानसूनी बारिश कम हुई है। इसका असर रबी फसलों की बुवाई पर हो रहा है। इससे रबी फसलों की पैदावार कम होने की आशंका है।

कम बारिश से रबी फसलों की बुवाई सुस्त चल रही है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी के चलते कुछ राज्यों में गेहूं की बुवाई अभी शुरू ही हुई है। अब तक 11,000 हेक्टेयर में गेहूं बोया गया है, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह रकबा 27,000 हेक्टेयर था। कृषि मंत्रालय ने 23 अक्टूबर तक के बुवाई संबंधी आंकड़े जारी करते हुए कहा कि कुछ राज्यों में गेहूं की बुवाई अभी शुरू ही हुई है। गेहूं प्रमुख रबी फसल है। इसकी बुवाई आम तौर पर अक्टूबर-नवंबर में होती है और कटाई मार्च-अप्रैल में की जाती है। 2025-26 के फसल वर्ष (जुलाई-जून) में 336 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था।

Rabi Crops

रबी फसलों की बुवाई

मानसून में 13 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई

मंत्रालय ने पिछले वर्ष 12.07 करोड़ टन के रिकॉर्ड उत्पादन के बाद फसल वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 12.1 करोड़ टन तय किया है। मौसम विभाग के अनुसार, जून-सितंबर के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून में 13 प्रतिशत की कमी रही। कमजोर मानसून के कारण रबी मौसम की शुरुआत में मिट्टी में बची नमी कम रहती है और जलाशयों एवं नहरों में पानी का स्तर भी नीचे रहता है। गेहूं की बुवाई के बाद कई बार सिंचाई की जरूरत होती है। इसलिए कम बारिश से बुवाई में देरी हो सकती है, रकबा घट सकता है और पैदावार पर असर पड़ सकता है।

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