Petrol-Diesel Price and Fuel Consumption in India:आर्थिक गतिविधियों में सुधार का असर पेट्रोल-डीजल सहित दूसरे ईंधन की खपत पर दिखा है। फरवरी में पिछले 24 साल की सबसे ज्यादा ईंधन खपत हुई है। इस दौरान ईंधन की खपत 5 फीसदी से ज्यादा बढ़कर प्रति दिन 4.82 मिलियन बैरल पहुंच गई है। इस दौरान पेट्रोल की खपत में 8.9 फीसदी और डीजल की खपत में 7.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
पेट्रोल-डीजल की खपत में रिकॉर्ड बढ़त
अहम बात यह है कि एक तरफ जहां भारत में ईंधन की खपत रिकॉर्ड स्तर पर है। दूसरी तरह कच्चे तेल की कीमतें भी लगातार गिर रही है। वहीं भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर और बचत कर रहा है। ऐसे में देखना यह है कि क्या मोदी सरकार लोगों को कीमतों पर राहत देगी। पिछले एक साल में कच्चे तेल की कीमतें 140 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 81.12 डॉलर (ब्रेंट क्रूड) पर आ गई हैं। अंतिम बार मई 2022 में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी की गई थी।
कितनी बढ़ी खपत
पेट्रोलियम मंत्रालाय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के रिकॉर्ड के अनुसार भारत में 1998 से पेट्रोल-डीजल की खपत के रिकॉर्ड यह सेल देख रहा है। और पिछले 24 साल में सबसे अधिक ईंधन की खपत का रिकॉर्ड बना है। फरवरी में पेट्रोल की खपत 8.9 फीसदी बढ़कर 2.8 मिलियन टन हो गई, जबकि डीजल की खपत 7.5 फीसदी बढ़कर 6.98 मिलियन टन हो गई। वहीं जेट ईंधन की बिक्री 43 फीसदी बढ़कर 0.62 मिलियन टन हो गई। हालांकि इस दौरान LPG की बिक्री घटी है। फरवरी में एलपीजी की बिक्री 0.1 फीसदी घटकर 23.9 लाख टन रह गई है।
40 फीसदी सस्ता हुआ कच्चा तेल
कच्चे तेल की कीमतों को देखा जाय तो उसमें गिरावट का दौर जारी है। मई 2022 में ब्रेंट क्रूड जहां 140 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। वह गिरकर मार्च में 81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। जबकि भारत में पेट्रोल-डीजल कीमतें मई 2022 के बाद से नहीं घटी है। उस समय केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती की थी। ऐसे में जब कच्चे तेल की कीमतें पिछले 10 महीने में 40 फीसदी गिर गई हैं। इसे देखते हुए आम लोगों की सरकार पर नजर है कि वह पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी कर महंगाई से राहत दें।
(इनपुट रॉयटर्स के साथ)
