अंडमान की गहराइयों में छुपे तेल और गैस के खजाने की तलाश अब तेज होने जा रही है। देश की प्रमुख तेल कंपनी ओएनजीसी (ONGC) और ब्रिटेन की ऊर्जा दिग्गज बीपी (BP) ने हाथ मिलाकर भारत के समुद्री क्षेत्रों में तेल और गैस खोज की एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है। यह साझेदारी न सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि इससे भारत को $20 ट्रिलियन की इकोनॉमी बनाने की राह में भी जबरदस्त मदद मिल सकती है। अंडमान, सौराष्ट्र, बंगाल और महानदी जैसे अपतटीय क्षेत्रों में स्ट्रैटिग्राफिक कुओं की खुदाई के जरिए इस संभावित खजाने की तलाश शुरू की जा रही है, जो भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नई उड़ान दे सकता है।
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तेल की खोज
सरकारी तेल कंपनी ओएनजीसी (ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन) ने ब्रिटेन की दिग्गज ऊर्जा कंपनी बीपी (British Petroleum) के साथ हाथ मिलाया है। इस साझेदारी का मकसद भारत के चार समुद्री क्षेत्रों अंडमान, महानदी, सौराष्ट्र और बंगाल बेसिन में तेल और गैस के संभावित भंडार की खोज करना है।
यह खोज ‘स्ट्रैटिग्राफिक कुओं’ के जरिए की जाएगी। ये कुएं जमीन की गहराई में मौजूद परतों की बनावट और उनके घटकों को समझने के लिए खोदे जाते हैं। इनसे यह जानकारी मिलती है कि किसी जगह पर तेल या गैस की संभावना है या नहीं। ये कुएं सीधे तेल निकालने के लिए नहीं बल्कि भू-वैज्ञानिक अध्ययन के लिए होते हैं।
इस रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की मौजूदगी में 'ऊर्जा वार्ता 2025' नाम के एक कार्यक्रम में किए गए। पेट्रोलियम सचिव पंकज जैन ने कहा कि भारत में इस तरह की खुदाई का यह पहला प्रयास होगा। इस खोज में लगभग 2 लाख करोड़ लीटर (लगभग 22 बिलियन बैरल) कच्चे तेल के भंडार की संभावना है, जो भारत की अर्थव्यवस्था को $3.7 ट्रिलियन से $20 ट्रिलियन तक ले जा सकता है।
क्या करेंगी ONGC और BP?
समझौते के तहत ओएनजीसी इस पूरी परियोजना में निवेश करेगी, जबकि बीपी डिजाइन तैयार करने, स्थान चुनने और भू-वैज्ञानिक विश्लेषण जैसी तकनीकी सहायता देगी।
बीपी इंडिया के प्रमुख कार्तिकेय दुबे ने कहा कि गहरे समुद्र में तेल और गैस खोज की दिशा में यह साझेदारी भारत में नई संभावनाओं के दरवाजे खोल सकती है। यह पहल न सिर्फ देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए अहम है, बल्कि इससे भविष्य में बड़े पैमाने पर तेल और गैस के घरेलू भंडार खोजने की संभावनाएं भी बनेंगी।
