NSE Share Listing: नेशनल स्टॉक एक्स्चेंज यानी NSE के शेयरों की उम्मीद से कहीं नीचे लिस्टिंग हुई। हालांकि, लिस्टिंग के बाद जैसे ट्रेडिंग शुरू हुई शेयर में 5 फीसदी से ज्यादा का उछाल देखने को मिला है। IPO में 1785 रुपये के अपर प्राइस बैंड पर अलॉट हुए शेयर BSE 1800 रुपये पर लिस्ट हुई। इसके बाद ट्रेडिंग शुरू होते ही 1,878 तक उछल गए। इश्यू प्राइस के मुकाबले NSE Share Listing Price ₹1,800 रहा, जो 0.84% का लिस्टिंग गेन दिखाता है।
BSE पर लिस्ट हुए NSE के शेयर
BSE के आंकड़ों के मुताबिक ₹1,874 का भाव NSE के इश्यू प्राइस ₹1,785 से ₹89 रुपये यानी करीब 5% ऊपर है। वहीं ओपन प्राइस ₹1,800 के मुकाबले शेयर में करीब 42.39% की तेजी दर्ज की गई। कारोबार के शुरुआती दौर में NSE शेयर ने ₹1,845 का high और ₹1,800 का low बनाया।
2.58 करोड़ से ज्यादा शेयर का कारोबार
NSE के शेयर में शुरुआती कारोबार के दौरान अच्छी ट्रेडिंग एक्टिविटी दिखाई दी। अब तक करीब 2.58 करोड़ से ज्यादा शेयर का कारोबार हो चुका है। शेयर का VWAP (Volume Weighted Average Price) ₹1,833.63 रहा। इसका मतलब है कि कारोबार की बड़ी मात्रा औसतन ₹1,833 के आसपास हुई है। इससे पता चलता है कि listing price के मुकाबले शेयर ने शुरुआती कारोबार में ऊंचे स्तर पर trading की है।
₹1,878 बना नया हाई बनाया
लिस्टिंग के बाद NSE शेयर के लिए ₹1,878 अब तक हाई बनाया है। वहीं ₹1,800 इसका लो है। BSE ने शेयर के लिए 20% का प्राइस बैंड रखा है। इसके तहत अपर सर्किट ₹2,160 और लोअर सर्किट ₹1,440 का बनता है। यानी मौजूदा कारोबार में शेयर अभी अपने अपर प्राइस बैंड से नीचे है, लेकिन इश्यू प्राइस के मुकाबले अच्छी बढ़त पर बना हुआ है।
निवेशकों की नजर अब कमाई पर
NSE का IPO करीब ₹22,569 करोड़ का था और इश्यू प्राइस ₹1,785 तय किया गया था। लिस्टिंग के बाद शुरुआती फायदा मिलने के बावजूद अब निवेशकों का फोकस कंपनी के फंडामेंटल्स पर रहेगा। NSE की कमाई काफी हद तक ट्रेडिंग एक्टिविटी पर निर्भर करती है। इसलिए मार्केट वॉल्यूम, डेरिवेटिव कारोबार और रेगुलेटरी बदलावों और कैपिटल मार्केट भागीदारी आगे शेयर के प्रदर्शन के लिए अहम फैक्टर होंगे।
NSE के लिए बड़ा IPO, बड़ी शुरुआत
NSE का इश्यू देश के सबसे बड़े IPOs में शामिल रहा। मजबूत सब्सक्रिप्शन के बाद अब लिस्टिंग के पहले चरण में शेयर ने इश्यू प्राइस के ऊपर कारोबार करके शुरुआत की है। हालांकि, लिस्टिंग डे मूवमेंट को कंपनी के लॉन्ग टर्म वैल्यूएशन का अकेला आधार नहीं माना जा सकता। आगे शेयर की दिशा अर्निंग ग्रोथ, मार्केट वॉल्यूम और रेगुलेटरी माहौल से तय होगी।
