पैसे की जरूरत कभी भी पड़ सकती है। इसके लिए अगर आपके पास सेविंग है तो कोई बात नहीं। अगर नहीं है तो लोन का ही सहारा होता है। अब अगर आपको तुरंत पैसे की जरूरत है, तो क्या आपको पता है कि सेम डेट कहां से लोन मिल सकता है। बता दें कि भारत में कई बैंक, NBFC और रेगुलेटेड डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म 'इंस्टेंट' पर्सनल लोन देते हैं। आइए जानते हैं कि ये बैंक किस आधार पर तुरंत लोन देते हैं और अगर आपको चाहिए तो किन दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी?
लोन अप्रूवल
ये बातें आपके लिए जानना बहुत जरूर
सबसे पहले, 'इंस्टेंट' (तुरंत) शब्द का मतलब यह नहीं है कि आपको लोन तुरंत मिल ही जाएगा। इंस्टेंट मंजूरीका मतलब है कि पात्रता और क्रेडिट चेक के बाद लोन को जल्दी मंजूरी मिल जाना।
सेम डे लोन मिलना: इसमें आपका लोन मंजूर होता है और उसी दिन आपके अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। कई बैंक एलिजिबल ग्राहकों को 15 लाख रुपये तक का लोन देते है, और पैसे सिर्फ 10 मिनट में मिल जाता है।
डिजिटल KYC: इंस्टेंट' पर्सनल लोन देने में डिजिटल KYC का इस्तेमाल करते हैं। RBI अपने KYC फ्रेमवर्क के तहत डिजिटल और वीडियो-आधारित KYC प्रोसेस की इजाजत देता है।
क्रेडिट असेसमेंट (क्रेडिट की जांच): आपकी आय, क्रेडिट हिस्ट्री, मौजूदा कर्ज और पात्रता से जुड़ी दूसरी बातें लेंडर के फैसले पर असर डाल सकती हैं।
मौजूदा ग्राहकों के लिए लोन लेना आसान
बैंक आम तौर पर मौजूदा ग्राहकों को प्री-अप्रूव्ड लिमिट के साथ तेजी से लोन देते हैं। नए आवेदकों को ज्यादा समय लग सकता है। वहीं, NBFCs तेजी से लोन प्रोसेस करते हैं। हालांकि, NBFC बैंकों के मुकाबले ज्यादा ब्याज वसूलते हैं। इन दिनों कई डिजिटल लेंडिंग ऐप सिर्फ 10 मिनट में लोन देने का काम कर रहे हैं। सारा वर्क डिजिटल होने से प्रोसेसिंग में काफी कम वक्त लगता है।
इन 5 बातों का ध्यान रखें
अपना क्रेडिट स्कोर चेक करें: अप्लाई करने से पहले अपना क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट रिपोर्ट देखें। एक अच्छा क्रेडिट प्रोफाइल आपके लोन के मंजूर होने और अच्छी ब्याज दर मिलने की संभावना को बढ़ा सकता है।
कितने लोन की जरूरत है, यह तय करें: अपनी खास वित्तीय जरूरत के हिसाब से ही लोन लें। जरूरत से ज्यादा लोन लेने से आपका कुल रीपेमेंट का बोझ बढ़ सकता है।
वेरिफिकेशन चेक करें: उम्र, आय, रोजगार, निवास और क्रेडिट से जुड़ी पात्रता शर्तों को चेक करें। इससे आप लोन रिजेक्ट होने से बच सकते हैं।
डेटा और प्राइवेसी से जुड़ी बातें जानें: समझें कि लोन ऐप कौन सी पर्सनल और फाइनेंशियल जानकारी इकट्ठा करता है, इसकी जरूरत क्यों है, और आपके डेटा को कैसे स्टोर या इस्तेमाल किया जाता है।
ब्याज दरें और फीस: लोन चुनने से पहले ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज की तुलना करें। यह भी देखें कि क्या लेंडर फ्लैट-रेट या रिड्यूसिंग-बैलेंस तरीके से ब्याज की गणना करता है, क्योंकि इससे लोन लेने की असल लागत पर काफी असर पड़ सकता है। फ़्लै
