अगर आपके बैंक खाते से बिना अनुमति पैसे निकल गए हैं और इसकी वजह बैंक की लापरवाही है, तो RBI के नियमों के तहत आपको पूरा पैसा वापस मिलने का अधिकार हो सकता है। बैंक की लापरवाही में जरूरी सुरक्षा व्यवस्था की कमी, संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर कार्रवाई न करना या सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन न करना शामिल हो सकता है। ऐसे मामलों में ग्राहक की जिम्मेदारी शून्य हो सकती है, भले ही फ्रॉड की सूचना देने में देरी हुई हो। हालांकि, बैंक की गलती साबित होना जरूरी है।
RBI के नियम के तहत कब मिलेगा पूरा रिफंड
कब ग्राहक को उठाना पड़ सकता है नुकसान?
अगर ग्राहक खुद अपना OTP, PIN या पासवर्ड किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा करता है, तो मौजूदा नियमों के तहत रिपोर्ट करने तक हुए नुकसान की जिम्मेदारी ग्राहक पर आ सकती है। लेकिन अगर फ्रॉड बैंक या ग्राहक के अलावा किसी तीसरे पक्ष की सुरक्षा में कमी के कारण हुआ है, तो बैंक से सूचना मिलने के तीन कार्यदिवस के भीतर शिकायत करने पर ग्राहक को शून्य जिम्मेदारी का लाभ मिल सकता है। देरी होने पर नियमों के अनुसार ग्राहक की जिम्मेदारी सीमित हो सकती है या बैंक की नीति लागू हो सकती है।
1 जनवरी 2027 से बदलेंगे नियम
RBI के नए निर्देश 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इनके तहत बैंक को यह साबित करना होगा कि धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन के लिए ग्राहक जिम्मेदार है। नए नियमों में तीसरे पक्ष की सुरक्षा में कमी से जुड़े मामलों में रिपोर्ट करने की समय-सीमा पांच कैलेंडर दिन की होगी। घरेलू मामलों में शिकायत का निपटारा 45 दिनों और सीमा पार के मामलों में 60 दिनों के भीतर करने का प्रावधान है।
नए नियमों में छोटी रकम के फ्रॉड के लिए भी मुआवजे का प्रावधान है। पात्र व्यक्तिगत ग्राहकों को ₹50,000 तक के नुकसान वाले मामलों में, शर्तें पूरी होने पर, वास्तविक शुद्ध नुकसान का 85% या अधिकतम ₹25,000 इनमें से जो कम हो मिल सकता है। यह सुविधा जीवन में एक बार उपलब्ध होगी और इसके लिए बैंक तथा साइबर क्राइम पोर्टल या हेल्पलाइन पर पांच कैलेंडर दिन के भीतर शिकायत करना जरूरी होगा। यह मुआवजा हर मामले में पूरे नुकसान की भरपाई नहीं करता।
फ्रॉड होने पर तुरंत क्या करें?
अगर खाते से अनधिकृत ट्रांजैक्शन हो जाए, तो तुरंत बैंक के आधिकारिक ऐप, हेल्पलाइन या शाखा में शिकायत करें और शिकायत नंबर संभालकर रखें। साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और पर रिपोर्ट दर्ज करें। कार्ड, UPI या नेट बैंकिंग की सुरक्षा भी सुनिश्चित करें और मैसेज, बैंक स्टेटमेंट व अन्य सबूत सुरक्षित रखें। जल्दी शिकायत करने से पैसे रोकने या वापस पाने की संभावना बेहतर हो सकती है।
