अपना घर खरीदना जीवन के सबसे बड़े फैसलों में से एक होता है। अक्सर लोग होम लोन लेते समय अकेले ही आवेदन करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप अपनी मां को होम लोन में को-एप्लीकेंट (Co-applicant) बनाते हैं, तो इससे आपको न केवल वित्तीय मजबूती मिलती है, बल्कि आप लाखों रुपये की बचत भी कर सकते हैं। यह न केवल भावनात्मक रूप से सुखद है, बल्कि आर्थिक रूप से एक बहुत ही स्मार्ट फैसला साबित हो सकता है।
टैक्स में मिलती है दोगुनी बचत
मां को को-एप्लीकेंट बनाने का सबसे बड़ा फायदा इनकम टैक्स में मिलता है। आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत होम लोन के मूलधन (Principal) के भुगतान पर ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है, और धारा 24(b) के तहत ब्याज भुगतान पर ₹2 लाख तक की कटौती का लाभ मिलता है। अगर आप और आपकी मां दोनों कमाते हैं और सह-उधारकर्ता हैं, तो आप दोनों अलग-अलग इन टैक्स छूटों का दावा कर सकते हैं। इसका मतलब है कि एक ही लोन पर परिवार कुल मिलाकर ब्याज पर ₹4 लाख और मूलधन पर ₹3 लाख तक की टैक्स छूट का लाभ उठा सकता है, जिससे लाखों की बचत होती है।
कम ब्याज दर का लाभ
ज्यादातर बैंक और वित्तीय संस्थान महिला कर्जदारों को प्रोत्साहित करने के लिए होम लोन की ब्याज दरों में विशेष छूट देते हैं। आमतौर पर महिलाओं के लिए ब्याज दरें सामान्य दरों से 0.05% से 0.10% तक कम हो सकती हैं। सुनने में यह अंतर छोटा लग सकता है, लेकिन 20 या 25 साल के लंबे होम लोन टेन्योर में यह छोटी सी छूट भी आपकी ईएमआई (EMI) और कुल ब्याज के भुगतान में हजारों-लाखों रुपये कम कर देती है।
लोन मिलने की संभावना और लिमिट बढ़ जाती है
जब आप मां को को-एप्लीकेंट बनाते हैं, तो बैंक आपकी और आपकी मां की आय (Income) को जोड़कर आपकी लोन पात्रता (Loan Eligibility) तय करता है। यदि आपकी अकेले की सैलरी कम है और आपको बड़ा लोन चाहिए, तो मां की आय जुड़ने से आपको ज्यादा बड़ी रकम का लोन आसानी से मिल सकता है। इसके अलावा, अगर आपका सिबिल स्कोर (CIBIL Score) थोड़ा कम है और आपकी मां का क्रेडिट रिकॉर्ड अच्छा है, तो इससे लोन अप्रूवल की संभावना काफी बढ़ जाती है।
स्टाम्प ड्यूटी में छूट
भारत के कई राज्यों में अगर संपत्ति (Property) किसी महिला के नाम पर या उनके साथ संयुक्त रूप से खरीदी जाती है, तो स्टाम्प ड्यूटी (Stamp Duty) में रियायत दी जाती है। कई जगहों पर यह छूट 1% से 2% तक होती है। उदाहरण के लिए, आप ₹50 लाख का घर खरीद रहे हैं, तो 1% की छूट का मतलब है सीधे ₹50,000 की बचत। मां को को-एप्लीकेंट और सह-मालिक (Co-owner) बनाकर आप इस शुरुआती खर्च को कम कर सकते हैं।
