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लैब में बना GOLD! सालाना टनों उत्पादन का दावा, क्या कौड़ियों के भाव बिकेगा सोना?

हीरों के बाद अब सोना भी लैब में बनने लगा है। अमेरिकी स्टार्टअप के दावे ने दुनिया के गोल्ड मार्केट को हिलाकर रख दिया है। लेकिन, बड़ा सवाल है कि क्या वाकई अब सोना कौड़ियों के भाव बिकने लगेगा?

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लैब में बनेगा गोल्ड

Gold Production in Lab: क्या अब सोना कौड़ियों के भाव बिकेगा कभी लैब में बनकर बाजार में बिकेगा? अमेरिका की स्टार्टअप Marathon Fusion ने दावा किया है कि उसने न्यूक्लियर फ्यूजन से निकलने वाले न्यूट्रॉन्स की मदद से पारे को स्थिर सोने में बदल दिया है।

कंपनी के मुताबिक, भविष्य में एक गीगावॉट क्षमता वाला फ्यूजन प्लांट सालाना कई टन सोना बना सकता है। इससे सवाल उठने लगा है कि क्या सोने की कमी खत्म हो जाएगी और क्या भारत के RBI के खजाने में रखे सोने से लेकर आम लोगों के गहनों तक की कीमत पर असर पड़ेगा?

हालांकि, फिलहाल इस तकनीक का व्यावसायिक इस्तेमाल दूर है और कंपनी के हालिया प्रयोग के दावे का स्वतंत्र सत्यापन सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

पारे से सोना कैसे बनाएगी कंपनी?

Marathon Fusion ने 2025 में प्रकाशित अपने रिसर्च मॉडल में बताया था कि फ्यूजन रिएक्टर से निकलने वाले हाई-एनर्जी न्यूट्रॉन्स की मदद से Mercury-198 को Mercury-197 में बदला जा सकता है।

यह रेडियोएक्टिव आइसोटोप डिके होकर स्थिर Gold-197 में बदल जाता है। अब कंपनी ने 21 अक्टूबर 2026 को दावा किया कि उसने इस प्रक्रिया से वास्तविक सोना बनाया है।

कंपनी के मुताबिक, उसका प्रयोग CERN के 2025 के रिकॉर्ड से 10 गुना बेहतर है। हालांकि, प्रयोग में वास्तव में कितना सोना बना, इसकी मात्रा और उत्पादन लागत का विस्तृत स्वतंत्र सत्यापन अभी उपलब्ध नहीं है।

सालाना 2 से 5 टन सोना बनाने का अनुमान

कंपनी के रिसर्च मॉडल में एक गीगावॉट थर्मल क्षमता वाले फ्यूजन प्लांट से सालाना करीब 2 टन सोना बनाने की संभावना जताई गई है। अलग-अलग क्षमता संबंधी मान्यताओं के आधार पर एक गीगावॉट इलेक्ट्रिक प्लांट के लिए 2 से 5 टन सालाना उत्पादन का अनुमान भी सामने आया है। यह वास्तविक उत्पादन नहीं, बल्कि मॉडल पर आधारित अनुमान है।

क्यों बनते ही बाजार में नहीं बिकेगा सोना?

यह सोना बनते ही बाजार में नहीं बेचा जा सकेगा। क्योंकि इस प्रक्रिया में रेडियोएक्टिव आइसोटोप भी बन सकते हैं, जिन्हें सुरक्षित स्तर तक लाने के लिए स्टोरेज और जांच की जरूरत होगी। कंपनी के मॉडल में कुछ मानदंडों के तहत यह अवधि करीब 10 से 17 साल तक पहुंच सकती है। वास्तविक समय तैयार सोने में मौजूद आइसोटोप्स पर निर्भर करेगा।

क्या कौड़ियों के भाव बिकेगा सोना?

दुनिया में खदानों से हर साल करीब 3,672 टन सोना निकाला गया। इसके मुकाबले एक प्लांट से अनुमानित 2 से 5 टन उत्पादन वैश्विक माइन सप्लाई का बेहद छोटा हिस्सा होगा। इसलिए फिलहाल एक प्लांट से सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट की आशंका नहीं दिखती। इसके अलावा दुनिया की खदानों में मौजूदा रफ्तार के हिसाब से देखें, तो फिलहाल 18 से 20 साल का सोना बचा है।

क्या हो सकता है भविष्य?

इतिहास में टेक्नोलॉजी ने कई बाजार बदले हैं। एल्युमिनियम कभी बेहद महंगी धातु थी, लेकिन सस्ती उत्पादन तकनीक ने इसे आम बना दिया। लैब में बने हीरों ने प्राकृतिक हीरों के बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ाया।

हालांकि, सोने के मामले में परमाणु नाभिक बदलना पड़ेगा और इसके लिए बेहद महंगे उपकरण तथा फ्यूजन तकनीक की जरूरत होगी। लेकिन, इसकी वजह से आखिर में सोना सस्ता होने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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