मुकेश अंबानी ने कैसे पिता धीरूभाई के सपने में लगाए चारचांद, खड़ा किया 10 लाख करोड़ का डिजिटल साम्राज्य

Jio Success Story: भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी ने अपने पिता और रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक धीरूभाई अंबानी के सपने को न सिर्फ पूरा किया बल्कि 10 लाख करोड़ रुपये का डिजिटल साम्राज्य खड़ा किया। आइए जानते हैं उनकी इस सफलता की कहानी।

Jio Success Story : भारतीय उद्योगपति मुकेश अंबानी के पिता और रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक धीरूभाई अंबानी का एक फेमस सपना था, भारत में फोन पर बात करना एक पोस्टकार्ड भेजने से भी सस्ता होना चाहिए। धीरूभाई का मानना था कि संचार तकनीक केवल अमीर लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि देश के हर आम नागरिक की पहुंच में होनी चाहिए। जब मुकेश अंबानी ने टेलीकॉम क्षेत्र में कदम रखा, तो उन्होंने अपने पिता के इस विचार को इंटरनेट और डेटा के डिजिटल युग में लागू कर दिया। साल 2016 में रिलायंस जियो (Reliance Jio) के लॉन्च के साथ भारत के टेलीकॉम सेक्टर में जो क्रांति शुरू हुई, उसने न केवल देश में इंटरनेट के इस्तेमाल का तरीका बदल दिया, बल्कि आज रिलायंस की वैल्यूएशन को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है।

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मुकेश अंबानी ने पिता धीरूभाई के सपने को दी नई उड़ान (तस्वीर-ril.com)

25 अरब डॉलर का सबसे बड़ा दांव और एक बड़ा जोखिम

रिलायंस जियो की शुरुआत किसी सामान्य मोबाइल कंपनी की तरह धीरे-धीरे विस्तार करके नहीं हुई थी। सितंबर 2016 में व्यावसायिक लॉन्च से पहले ही मुकेश अंबानी ने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेक्ट्रम और अत्याधुनिक 4G तकनीक पर करीब 25 अरब डॉलर (करीब 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक) का भारी-भरकम निवेश कर दिया था। उस समय बिना किसी पक्के ग्राहक आधार के इतना बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना रिलायंस के इतिहास का सबसे बड़ा व्यावसायिक जोखिम था। मुकेश अंबानी ने खुद एक इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा रिस्क था। उस समय कई बाजार एक्सपर्ट्स का मानना था कि भारत इतनी आधुनिक डिजिटल तकनीक के लिए तैयार नहीं है। लेकिन मुकेश अंबानी का दृष्टिकोण स्पष्ट था। उन्होंने अपनी बोर्ड बैठक में कहा था कि अगर यह निवेश वित्तीय रूप से बहुत बड़ा मुनाफा नहीं भी देता है, तो भी यह रिलायंस द्वारा भारत में किया गया सबसे बड़ा परोपकार होगा, क्योंकि यह पूरे देश को डिजिटाइज कर देगा। उनका मानना था कि अगर कनेक्टिविटी सस्ती और सुलभ हो जाए, तो भारत के करोड़ों लोग अपने आप डेटा का इस्तेमाल करने लगेंगे।

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