रिलायंस इंडस्ट्रीज की इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने कहा है कि जियो अब सिर्फ टेलीकॉम कंपनी नहीं, बल्कि एक टेक्नोलॉजी कंपनी है। कंपनी अपनी कमाई बढ़ाने के लिए मोबाइल सेवाओं के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड, ब्रॉडबैंड और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी पर ध्यान दे रही है। देश के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ से पहले आकाश अंबानी ने कहा कि जियो के लिए टेलीकॉम और टेक्नोलॉजी में से किसी एक को चुनने का सवाल नहीं है, क्योंकि उसका नेटवर्क ही उसकी तकनीक है।
30,213 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी
जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। कंपनी नए शेयर जारी करके करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से शेयर बेचने का कोई प्रस्ताव नहीं है। आईपीओ के लिए प्रति शेयर कीमत 1,065 से 1,119 रुपये तय की गई है। ऊपरी कीमत पर कंपनी का मूल्यांकन करीब 108 अरब डॉलर होगा।
इस निर्गम में पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये और रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित हैं। वहीं, शुद्ध निर्गम का कम से कम 35 प्रतिशत हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए उपलब्ध होगा। आकाश अंबानी ने कहा कि इसका उद्देश्य रिलायंस से पीढ़ियों से जुड़े परिवारों को कंपनी में निवेश का अवसर देना भी है।
53.33 करोड़ ग्राहकों के साथ कमाई बढ़ाने पर जोर
जियो के पास 53.33 करोड़ ग्राहक हैं। कंपनी ने अपना 5G कोर नेटवर्क, क्लाउड आधारित रेडियो नेटवर्क और सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म खुद विकसित किया है। आकाश अंबानी के मुताबिक, कनेक्टिविटी जियो का पहला उत्पाद था। अब इसके साथ डिजिटल सेवाएं, एआई और क्लाउड को जोड़ा जा रहा है।
PTI/भाषा के मुताबिक उन्होंने कहा कि जियो का प्रत्येक ग्राहक औसतन हर महीने 43.7 जीबी डेटा इस्तेमाल करता है। कंपनी का लक्ष्य केवल ग्राहक संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि ग्राहकों को ज्यादा सेवाएं देना और उनके साथ जुड़ाव मजबूत करना भी है। उनके मुताबिक, मोबाइल रिचार्ज की कीमतें बढ़ाना कमाई बढ़ाने की पूरी कहानी नहीं है।
ब्रॉडबैंड, एआई और कारोबारियों पर नजर
आकाश अंबानी ने कहा कि भारत में अभी करीब 26 करोड़ लोग 2G सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की पहुंच लगभग 21 प्रतिशत घरों तक ही है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश में फिक्स्ड ब्रॉडबैंड के नए कनेक्शन बढ़ने में जियो की हिस्सेदारी 67.56 प्रतिशत रही। देश के 7.9 करोड़ से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) में डिजिटल सेवाओं को अपनाने वाले कारोबार अभी भी तीन प्रतिशत से कम हैं। कंपनी इसे कारोबार बढ़ाने का बड़ा अवसर मानती है।
सैटेलाइट इंटरनेट और 6G पर भी तैयारी
जियो दूरदराज के इलाकों तक कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए स्वदेशी उपग्रह समूह और जमीन पर जरूरी केंद्रों का नेटवर्क विकसित करने की संभावनाएं तलाश रही है। साथ ही, वैश्विक सैटेलाइट सेवा प्रदाताओं के साथ साझेदारी पर भी विचार किया जा रहा है। कंपनी की दीर्घकालिक योजना क्लाउड आधारित ढांचे के साथ 6G तकनीक विकसित करने की है, ताकि भविष्य में नेटवर्क में बड़े बदलाव के बजाय मुख्य रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट से नई तकनीक अपनाई जा सके।
7,220 पेटेंट आवेदन, एआई सेवाओं पर भी काम
जियो ने अब तक 7,220 पेटेंट आवेदन दाखिल किए हैं। कंपनी के करीब 45 प्रतिशत पूर्णकालिक कर्मचारी यानी 12,477 लोग डिजिटल उत्पादों और तकनीक के विकास में काम करते हैं। वर्ष 2025 में जियो पेटेंट सहयोग संधि (PCT) की वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष 20 कंपनियों में शामिल रही।
कंपनी गूगल के साथ मिलकर ग्राहकों को 18 महीने तक बिना अतिरिक्त लागत के Google AI Pro प्लान दे रही है। वहीं, रिलायंस इंटेलिजेंस और मेटा से जुड़े संयुक्त उद्यम के जरिए भारतीय कारोबारियों तक एंटरप्राइज एआई उत्पाद पहुंचाने की योजना है।
आईपीओ से मिलने वाली रकम से 5G, ब्रॉडबैंड, एआई, क्लाउड और एंटरप्राइज सेवाओं में निवेश की गुंजाइश बढ़ेगी। वित्त वर्ष 2025-26 में जियो का शुद्ध ऋण-ईबीआईटीडीए अनुपात घटकर 0.36 गुना रह गया, जो वित्त वर्ष 2023-24 में 0.88 गुना था। कंपनी स्थानीय भागीदारों के साथ भारत के बाहर भी अपने टेक्नोलॉजी कारोबार का विस्तार करना चाहती है।
