ITR Filing : इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय शुरू हो चुका है। ऐसे में कई टैक्सपेयर्स अपने टैक्स और रिफंड को लेकर जानकारी जुटा रहे हैं। अक्सर नौकरीपेशा लोगों, बैंक जमाकर्ताओं और अन्य आय प्राप्त करने वालों के खाते से टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS Refund) के रूप में पहले ही कर काट लिया जाता है। लेकिन कई बार यह कटौती वास्तविक टैक्स देनदारी से अधिक हो जाती है। ऐसी स्थिति में आप ITR दाखिल करके अतिरिक्त कटे हुए टैक्स का रिफंड प्राप्त कर सकते हैं।
ITR फाइलिंग AY 2026-27: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय TDS रिफंड का दावा कैसे करें
क्या होता है TDS रिफंड?
TDS यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स वह व्यवस्था है, जिसके तहत भुगतान करने वाला व्यक्ति या संस्था आपकी आय से पहले ही कुछ टैक्स काटकर सरकार के खाते में जमा कर देती है। यदि पूरे वित्त वर्ष में आपके नाम पर जमा किया गया TDS आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी से ज्यादा है, तो आपको उस अतिरिक्त राशि का रिफंड मिल सकता है। इसके अलावा अगर आपकी कुल टैक्स योग्य आय बेसिक छूट सीमा से कम है और आपके ऊपर कोई टैक्स नहीं बनता, फिर भी TDS कट गया है, तो आप पूरा TDS वापस पाने के लिए रिफंड का दावा कर सकते हैं।
किन आय स्रोतों पर कटता है TDS?
TDS कई प्रकार की आय पर काटा जाता है। इनमें वेतन (Salary), बैंक ब्याज, डिविडेंड आय, प्रोफेशनल फीस, कंसल्टेंसी शुल्क, कमीशन, ब्रोकरेज, कॉन्ट्रैक्ट भुगतान, लॉटरी से हुई कमाई और ऑनलाइन गेमिंग से प्राप्त आय शामिल हैं। इन सभी मामलों में भुगतान प्राप्त करने से पहले टैक्स काट लिया जाता है, जिसे बाद में ITR दाखिल करके क्लेम किया जा सकता है।
TDS रिफंड क्लेम करने से पहले करें यह काम
ITR दाखिल करने से पहले अपने Form 26AS की जांच करना बेहद जरूरी है। यह दस्तावेज आपके PAN से जुड़ा होता है और इनकम टैक्स विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध रहता है। इसमें आपके नाम पर विभिन्न संस्थानों द्वारा काटे गए TDS की पूरी जानकारी दर्ज होती है। Form 26AS में वेतन, ब्याज और अन्य आय पर काटे गए टैक्स के अलावा एडवांस टैक्स और सेल्फ-असेसमेंट टैक्स का डिटेल भी देखा जा सकता है। रिटर्न भरने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि सभी TDS एंट्री सही तरीके से दर्ज हैं।
ITR दाखिल करते समय कैसे करें रिफंड का दावा?
रिटर्न दाखिल करते समय अपनी सभी आय की सही जानकारी भरें और TDS का विवरण Form 26AS से मिलान करें। इनकम टैक्स विभाग का सिस्टम स्वतः आपकी कुल टैक्स देनदारी की गणना करता है। अगर आपके नाम पर जमा TDS आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी से अधिक है, तो अतिरिक्त राशि रिफंड के रूप में दिखाई देगी। रिटर्न जमा करने के बाद आपको अलग से किसी आवेदन की जरूरत नहीं पड़ती। सिस्टम स्वतः रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर देता है।
ई-वेरिफिकेशन के बाद ही मिलेगा रिफंड
ITR दाखिल करने के बाद उसका ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है। यह प्रक्रिया आधार OTP, नेट बैंकिंग या अन्य स्वीकृत माध्यमों से पूरी की जा सकती है। ई-वेरिफिकेशन सफल होने के बाद इनकम टैक्स विभाग रिटर्न की प्रोसेसिंग शुरू करता है। रिटर्न प्रोसेस होने पर रिफंड की राशि सीधे आपके प्री-वैलिडेटेड बैंक खाते में भेज दी जाती है।
कैसे चेक करें रिफंड का स्टेटस?
रिफंड की स्थिति जानने के लिए इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें। इसके बाद ‘e-File’ सेक्शन में जाकर ‘Income Tax Returns’ और फिर ‘View Filed Returns’ विकल्प चुनें। यहां संबंधित असेसमेंट ईयर AY 2026-27 का चयन करें। इसके बाद ‘View Details’ पर क्लिक करके अपने रिटर्न की प्रोसेसिंग और रिफंड की पूरी जानकारी देख सकते हैं। स्टेटस में Refund Issued, Refund Partially Adjusted, Refund Failed या Outstanding Demand के खिलाफ Adjusted जैसे विकल्प दिखाई दे सकते हैं।
किन कारणों से फेल हो सकता है रिफंड?
कई बार तकनीकी या दस्तावेजी कारणों से रिफंड जारी नहीं हो पाता। अगर PAN आधार से लिंक नहीं है और PAN निष्क्रिय हो गया है, तो रिफंड अटक सकता है। इसके अलावा बैंक खाता प्री-वैलिडेटेड न होना, गलत IFSC कोड दर्ज होना, PAN और बैंक रिकॉर्ड में अंतर होना या बंद बैंक खाते की जानकारी देना भी रिफंड फेल होने की प्रमुख वजहें हैं। इसलिए रिफंड प्राप्त करने के लिए यह सुनिश्चित करें कि आपका PAN आधार से लिंक हो, बैंक खाता सही तरीके से प्री-वैलिडेटेड हो और सभी बैंकिंग विवरण अपडेट एवं सही हों। इससे आपका टैक्स रिफंड बिना किसी परेशानी के समय पर आपके खाते में पहुंच जाएगा।
