रियल एस्टेट में निवेश को एवरग्रीन माना जाता है। अगर आपकी प्रॉपर्टी कानूनी रूप से वैध तो लंबी अवधि में शानदार रिटर्न मिलना तय है। पिछले 5 साल के रिटर्न को देखें तो रियल स्टेट ने शेयर बाजार को भी पीछे छोड़ दिया है। इसके चलते युवाओं का रुझान तेजी से प्रॉपर्टी में बढ़ा है। हालांकि, इस बीच चर्चा का दौर यह है कि अब मेट्रो या बड़े शहरों के मुकाबले Tier-2 सिटीज और छोटे शहरों में निवेश करना ज्यादा फायदे का सौदा है। आइए रियल एस्टेट एक्सपर्ट से समझने की कोशिश करते हैं कि क्या सही में मेट्रो सिटीज का दौर खत्म हो गया?
प्रॉपर्टी निवेश
छोटे शहरों के प्रति क्यों बढ़ा रुझान?
CII-Knight Frank India की रिपोर्ट के मुताबिक, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़ ट्राइसिटी, गोवा, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, लखनऊ, नागपुर, विशाखापट्टनम और कोयंबटूर जैसे शहरों में 2016 से 2026 के बीच घरों की कीमतें औसतन 8% सालाना की दर से बढ़ीं। वहीं, मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, पुणे, अहमदाबाद और कोलकाता जैसे 8 बड़े शहरों में यह बढ़ोतरी करीब 4% सालाना रही। यानी पिछले एक दशक में टियर-2 शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें बड़े शहरों के मुकाबले लगभग दोगुनी तेजी से बढ़ी हैं। यही कारण है कि निवेशकों का रुझान छोटे शहरों की ओर हो रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार से मिला बूस्ट
2021 से 2026 के बीच इन 11 उभरते शहरों में घरों की कीमतें 63% बढ़ीं, जबकि बड़े शहरों में यह बढ़ोतरी 42% रही। इन शहरों में औसत आवासीय कीमत करीब ₹4,500 से ₹13,500 प्रति वर्ग फुट के बीच है। रिपोर्ट के मुताबिक, बेहतर सड़क, एयरपोर्ट, मेट्रो और दूसरी कनेक्टिविटी परियोजनाओं के साथ इन शहरों में रोजगार और कारोबार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रियल एस्टेट बाजार 2047 तक 5.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों की हिस्सेदारी करीब 25-30%, यानी 1.4 से 1.7 ट्रिलियन डॉलर तक हो सकती है।
क्या अब मेट्रो शहरों के प्रॉपर्टी में निवेश फायदेमंद नहीं?
दिग्गज रियल एस्टेट एक्सपर्ट और अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप के सीएमडी राकेश यादव से जब हमने यह पूछा कि क्या मेट्रो शहरों में प्रॉपर्टी का आकर्षण घट गया है और अब छोटे शहर ही निवेशकों की पहली पसंद बन गए हैं, तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है। दोनों बिल्कुल अलग-अलग मार्केट हैं। दोनों मार्केट में निवेशक भी बिल्कुल अलग हैं। निवेशकों की प्राथमिकता भी अलग है। इसलिए यह कह देना कि बड़े शहरों में प्रॉपर्टी निवेश अब फायदेमंद नहीं रहा, तो यह सरासर गलत है।
ऐसा होता तो नोएडा, गुरुग्राम, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे शहरों में प्रॉपर्टी की बिक्री नहीं होती। हां, यह सही है कि उभरते हुए शहरों में प्रॉपर्टी की कीमत में बढ़ोतरी तेजी से होती है। इससे निवेशकों को फायदा जरूर अधिक लग सकता है। लेकिन छोटे शहरों की अपनी परेशानी भी है। छोटे शहरों में लिक्विडिटी की समस्या रहती है। प्रॉपर्टी बेचने पर तुरंत खरीदार मिलना मुश्किल होता है। वहीं, मेट्रो शहरों के साथ यह नहीं है। यहां प्रॉपर्टी बेचना बहुत ही आसान है।
इतना ही नहीं, सुरक्षा और लाइफस्टाइल की दृष्टि से भी मेट्रो शहर हमेशा से छोटे शहरों से बेहतर हैं। इसलिए यह कहना कि मेट्रो शहरों में प्रॉपर्टी निवेश का दौर खत्म हो गया है, बिल्कुल गलत है। बड़े शहरों का प्रॉपर्टी मार्केट अपनी जगह पर बना रहेगा। हां, आबादी बढ़ने और रोजगार के मौके छोटे शहरों में होने से वहां भी नया प्रॉपर्टी मार्केट बनेगा।
