US India Trade Deal : अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के रिश्तों में व्यापार, रूसी तेल की खरीद और वीजा नीतियों को लेकर तनाव बना हुआ है।
रूबियो जयशंकर की मुलाकात
आज मंगलवार, 20 अक्टूबर को मुंबई में रुबियो और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मुलाकात होनी है। इस बैठक में द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Trade Deal), ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग, निवेश और नई तकनीकों पर चर्चा होने की उम्मीद है। पश्चिम एशिया की स्थिति भी बातचीत के एजेंडे में शामिल है।
इस बैठक की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि रुबियो ने भारत आने से पहले संकेत दिया है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देश बेहद करीब हैं।
ट्रेड डील पर बन सकती है सहमति
रुबियो ने उज्बेकिस्तान में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि अमेरिका भारत के साथ ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है और दोनों देश इसके काफी करीब हैं। उनके इस बयान से लंबे समय से अटके व्यापार समझौते को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं।
भारत और अमेरिका 2025 की शुरुआत से प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच टैरिफ, गैर-टैरिफ बाधाओं और बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई है। भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों को उसके प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ शर्तें मिलें।
रूसी तेल पर टैरिफ से भारत को कितनी राहत?
भारत-अमेरिका रिश्तों में सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक रूस से कच्चे तेल की खरीद है। अमेरिका में प्रस्तावित सख्त रूस-संबंधी प्रतिबंधों और टैरिफ प्रावधानों से भारत के सामान पर 100% तक टैरिफ का जोखिम पैदा हो सकता था।
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल में रूस से जुड़े कुछ प्रतिबंधों और टैरिफ प्रावधानों पर छूट दी है। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दबाव कम हुआ है और ट्रेड डील की संभावनाओं को भी बल मिला है।
H-1B वीजा और इमिग्रेशन नीतियों पर भी चर्चा संभव
भारत-अमेरिका संबंधों पर व्यापार के अलावा अमेरिकी वीजा और इमिग्रेशन नीतियों का भी असर पड़ा है। H-1B वीजा से जुड़ी बढ़ी लागत और अन्य आव्रजन प्रतिबंधों ने भारतीय पेशेवरों तथा IT कंपनियों के लिए चिंता बढ़ाई है। इसलिए बैठक में आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय कुशल पेशेवरों की आवाजाही से जुड़े मुद्दे उठ सकते हैं।
पश्चिम एशिया के संकट पर भी विचार-विमर्श
भारत और अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा तथा पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर भी विचार साझा करेंगे। क्षेत्र में तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक कारोबार पर पड़ सकता है। इसलिए इस मुद्दे का महत्व केवल कूटनीति तक सीमित नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक और ऊर्जा संबंधी प्राथमिकताओं से भी जुड़ा है।
रुबियो मुंबई में ताज मेमोरियल पर 26/11 आतंकी हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि भी देंगे। इसके बाद उनका गुजरात के जामनगर जाने का कार्यक्रम है, जहां दुनिया की प्रमुख रिफाइनरी में शामिल रिलायंस के रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स पर भी नजर रहेगी।
