India Slary Hike 2026 : देश की कंपनियां साल 2026 में कर्मचारियों की सैलरी में औसतन 9.1 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर सकती हैं। यह अनुमान EY इंडिया की ‘फ्यूचर ऑफ पे’ रिपोर्ट में लगाया गया है, जो सोमवार को जारी की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां बदलते कारोबारी माहौल को देखते हुए अपनी वेतन नीति में बड़े बदलाव कर रही हैं। अब सिर्फ सालाना इंक्रीमेंट पर जोर नहीं होगा, बल्कि कर्मचारियों के कौशल (स्किल) और उनके प्रदर्शन के आधार पर वेतन तय करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
भारत में सैलरी बढ़ोतरी पर रिपोर्ट (तस्वीर-istock)
स्किल और परफॉर्मेंस पर बढ़ा जोर
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक EY इंडिया की ‘फ्यूचर ऑफ पे’ रिपोर्ट बताती है कि कंपनियों के व्यापारिक लक्ष्य और प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। ऐसे में वे उन कर्मचारियों को ज्यादा महत्व दे रही हैं, जिनके पास नई और जरूरी स्किल्स हैं। अब वेतन वृद्धि केवल अनुभव या पद के आधार पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करेगी कि कर्मचारी कंपनी के लिए कितना उपयोगी है और वह कितने अच्छे रजिल्ट दे रहा है। करीब आधी कंपनियां अब स्किल-आधारित वेतन प्रणाली को अपना रही हैं या उसे लागू करने की तैयारी में हैं।
किन सेक्टरों में होगी सबसे ज्यादा बढ़ोतरी?
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक क्षमता केंद्रों में सबसे ज्यादा 10.4 प्रतिशत वेतन वृद्धि होने का अनुमान है। ये वे केंद्र होते हैं जहां बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने महत्वपूर्ण कामकाज का संचालन करती हैं। इसके बाद वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में करीब 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि की संभावना जताई गई है। ई-कॉमर्स सेक्टर में 9.9 प्रतिशत और जीवन विज्ञान तथा औषधि (फार्मा) क्षेत्र में 9.7 प्रतिशत तक वेतन बढ़ सकता है। इससे साफ है कि टेक्नोलॉजी, फाइनेंस, ऑनलाइन कारोबार और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में कुशल कर्मचारियों की मांग लगातार बनी हुई है।
16 सेक्टर और 178 कंपनियों के आंकड़े
इस रिपोर्ट में भारत के 16 अलग-अलग क्षेत्रों और 178 कंपनियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि वेतन वृद्धि का अनुमान व्यापक सर्वे के आधार पर तैयार किया गया है। कंपनियां अब बाजार की प्रतिस्पर्धा, लागत और कर्मचारियों को बनाए रखने की जरूरत को ध्यान में रखकर सैलरी स्ट्रक्चर तय कर रही हैं।
नौकरी छोड़ने की दर में कमी
रिपोर्ट के मुताबिक कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर (एट्रिशन रेट) में भी कमी आई है। साल 2025 में यह दर घटकर 16.4 प्रतिशत रह गई, जो 2024 में 17.5 प्रतिशत थी। इसका मतलब है कि अब पहले की तुलना में कम लोग नौकरी छोड़ रहे हैं। हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि 80 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी अपनी मर्जी से नौकरी बदल रहे हैं। यानी वे बेहतर अवसर, ज्यादा वेतन या बेहतर कार्य माहौल की तलाश में खुद ही नई नौकरी चुन रहे हैं, न कि कंपनी के दबाव में नौकरी छोड़ रहे हैं।
कंपनियों की रणनीति में बदलाव
EY इंडिया के एक्सपर्ट्स अभिषेक सेन के अनुसार, कंपनियां अब अपने कर्मचारियों में निवेश करने के तरीके को बदल रही हैं। पहले वेतन वृद्धि मुख्य रूप से सालाना इंक्रीमेंट के रूप में दी जाती थी, लेकिन अब कंपनियां यह तय कर रही हैं कि किन-किन कौशलों में निवेश करना है और किन परिणामों के लिए कर्मचारियों को प्रोत्साहन देना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में वेतन केवल इस बात से तय नहीं होगा कि सालाना बढ़ोतरी कितनी हुई, बल्कि इस पर भी ध्यान दिया जाएगा कि कर्मचारी ने कौन सी नई स्किल सीखी, उसने कंपनी के लक्ष्यों को हासिल करने में कितना योगदान दिया और वह संगठन के लिए कितनी रणनीतिक अहमियत रखता है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट से साफ है कि आने वाले समय में भारत में वेतन संरचना ज्यादा लचीली, प्रदर्शन-आधारित और कौशल-केंद्रित होने जा रही है। कंपनियां प्रतिस्पर्धा और स्थिरता के बीच संतुलन बनाते हुए कर्मचारियों को आकर्षित और बनाए रखने की नई रणनीति अपना रही हैं।
