भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है और इस विकास के पहिये को घुमाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरत 'कच्चे तेल' (Crude Oil) की होती है। भारत अपनी तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात (Import) करके पूरा करता है। अक्सर चर्चाओं में रूस और यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी तेल का नाम सबसे ऊपर रहता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत किसी एक या दो नहीं, बल्कि दुनिया के 40 अलग-अलग देशों से तेल खरीदता है?
India-US ट्रेड डील के बाद से रूस से तेल खरीद चर्चा में बनी हुई है। तो ऐसे में आइए जानते हैं भारत किन किन देशों से कितना कच्चा तेल खरीदता है?
रूस का दबदबा 35% हिस्सेदारी के साथ नंबर 1
पिछले कुछ सालों में भारत की तेल रणनीति में रूस सबसे बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा। साल 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 35 से 36 प्रतिशत रही है। हालांकि, अब अमेरिका और अन्य देशों के बढ़ते दबाव और नए टैरिफ की चेतावनियों के बीच रूस से होने वाली सप्लाई में थोड़ी कमी आने के संकेत भी मिले हैं।
इराक और मिडिल ईस्ट का साथ
रूस के बाद भारत का सबसे भरोसेमंद साथी इराक बना हुआ है। इराक की हिस्सेदारी 20 से 23 प्रतिशत के बीच है। इसके बाद सऊदी अरब (16-18%) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का नंबर आता है, जो करीब 8 से 10 प्रतिशत तेल की आपूर्ति करता है। दिलचस्प बात यह है कि साल 2022 से पहले भारत सिर्फ 27 देशों से तेल लेता था, लेकिन अब यह दायरा बढ़कर 40 देशों तक पहुँच गया है, जिसमें हाल ही में अर्जेंटीना जैसे नए देश भी शामिल हुए हैं।
वेनेजुएला
एक समय था जब वेनेजुएला भारत का एक प्रमुख तेल सप्लायर हुआ करता था। 2013 में भारत के तेल बास्केट में इसकी हिस्सेदारी 12.4% थी। वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार (लगभग 303 अरब बैरल) है, जो सऊदी अरब से भी ज्यादा है। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों, भुगतान की समस्याओं और डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनियों के कारण वेनेजुएला से आयात घटकर मात्र 0.3 से 0.6 प्रतिशत रह गया है। अमेरिकी दबाव के चलते भारतीय रिफाइनर्स ने यहाँ से तेल खरीदना लगभग बंद सा कर दिया है।
जियोपॉलिटिक्स और अमेरिका की चुनौती
भारत का तेल आयात सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि एक बड़ी कूटनीति (Geopolitics) है। अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी है कि वह रूस से तेल की खरीद कम करे, वरना टैरिफ का बोझ बढ़ाया जा सकता है। भारत की रणनीति हमेशा से 'सस्ता और सुरक्षित' विकल्प चुनने की रही है। यही कारण है कि भारत ने किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय 40 देशों का एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया है ताकि युद्ध या प्रतिबंधों की स्थिति में देश में ईंधन की किल्लत न हो।
