निवेश करने से पहले ज्यादातर लोगों के मन में एक सवाल आता है कि अगर आज 1 लाख रुपये लगाए जाएं, तो वह कितने साल में 2 लाख, 3 लाख या 4 लाख रुपये बन सकते हैं। इसका अनुमान लगाने के लिए आपको हर बार कैलकुलेटर या किसी विशेषज्ञ की मदद लेने की जरूरत नहीं है। निवेश से जुड़े कुछ आसान फॉर्मूले हैं, जिनकी मदद से आप कुछ सेकेंड में यह हिसाब लगा सकते हैं। इन्हें Rule of 72, Rule of 114 और Rule of 144 कहा जाता है। ये फॉर्मूले कंपाउंडिंग यानी चक्रवृद्धि रिटर्न के आधार पर निवेश की रकम बढ़ने का अनुमान लगाने में मदद करते हैं।
कितने साल में पैसा होगा 2, 3 या 4 गुना?
Rule of 72: कितने साल में पैसा होगा डबल?
अगर आप जानना चाहते हैं कि आपका निवेश कितने साल में दोगुना हो सकता है, तो Rule of 72 का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए 72 को निवेश पर मिलने वाले अनुमानित सालाना रिटर्न से भाग देना होता है। उदाहरण के लिए, अगर आपको सालाना 8 फीसदी रिटर्न मिलने की उम्मीद है, तो 72 को 8 से भाग देने पर 9 आता है। इसका मतलब है कि इस दर से आपका पैसा लगभग 9 साल में दोगुना हो सकता है। इसी तरह 12 फीसदी सालाना रिटर्न पर रकम करीब 6 साल में डबल होने का अनुमान है।
Rule of 114: पैसा तीन गुना कब होगा?
अगर आपका लक्ष्य निवेश की रकम को तीन गुना करना है, तो Rule of 114 काम आएगा। इसके लिए 114 को अनुमानित सालाना रिटर्न से भाग करना होता है। मान लीजिए आपने 1 लाख रुपये निवेश किए और उस पर सालाना 12 फीसदी रिटर्न मिलता है। ऐसे में 114 को 12 से भाग देने पर 9.5 साल आता है। यानी इस अनुमान के मुताबिक 1 लाख रुपये बढ़कर लगभग 3 लाख रुपये हो सकते हैं। हालांकि, इसके लिए रिटर्न की दर और कंपाउंडिंग की परिस्थितियां अनुकूल रहनी जरूरी हैं।
Rule of 144: पैसा चार गुना करने का हिसाब
निवेश की रकम चार गुना होने में कितना समय लग सकता है, यह जानने के लिए Rule of 144 का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें 144 को अनुमानित सालाना रिटर्न से भाग देना होता है। उदाहरण के लिए, अगर निवेश पर सालाना 10 फीसदी रिटर्न मिलता है, तो 144 को 10 से भाग देने पर 14.4 साल आता है। इस हिसाब से 1 लाख रुपये लगभग 14.4 साल में 4 लाख रुपये हो सकते हैं। यह गणना तभी उपयोगी है, जब निवेश पर मिलने वाला रिटर्न अनुमान के आसपास बना रहे।
निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान
ये तीनों फॉर्मूले निवेश की योजना बनाने के लिए उपयोगी हैं, लेकिन इन्हें पैसे बढ़ने की गारंटी नहीं समझना चाहिए। म्यूचुअल फंड और शेयर बाजार में रिटर्न घटता-बढ़ता रहता है। इसलिए वास्तविक समय इन अनुमानों से अलग हो सकता है। निवेश चुनते समय अपने वित्तीय लक्ष्य, जोखिम उठाने की क्षमता, निवेश की अवधि और जरूरतों को ध्यान में रखें। साथ ही महंगाई और टैक्स का असर भी समझें, क्योंकि रकम बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि उसकी खरीदने की क्षमता भी उसी अनुपात में बढ़ेगी।
