Tax On Fixed Deposit: फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करना लोकप्रिय निवेश विकल्प है। लेकिन इस तरह के निवेश पर टैक्स के बाद मिलने वाला रिटर्न आम तौर पर बैंक की ओर से ऑफर की जाने वाली ब्याज दर से कम होता है। मई 2023 में फंड्सइंडिया की वेल्थ कन्वर्सेशन रिपोर्ट के अनुसार, SBI, PNB, HDFC बैंक और ICICI जैसे बैंकों में 6 महीने के डिपॉजिट के लिए एवरेज इंटरेस्ट रेट लगभग 5% है।
फिक्स्ड डिपॉजिट
हालांकि पोस्ट-टैक्स रिटर्न केवल 3.49% है। इसी तरह 5 साल डिपॉजिट के लिए एवरेज इंटरेस्ट रेट लगभग 6.75% है, लेकिन टैक्स के बाद रिटर्न केवल 4.9% है।
FD पर लगने वाला टैक्स
FD पर टैक्स कैसे लगता है?
एक साल में FD पर आप जो भी ब्याज कमाते हैं, वो आपकी सालाना आय में जुड़ जाता है। अगर आपकी इनकम टैक्स के दायरे में आती हैं तो स्लैब रेट के हिसाब से इस पर टैक्स चुकाना पड़ता है। ITR फाइल करते समय इसे इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज में शामिल किया जाता है।
इसके अलावा टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स यानी TDS भी टैक्स होता है। जब बैंक आपकी इंटरेस्ट इनकम आपके अकाउंट में क्रेडिट करता है, तो उसी समय TDS काट लेता है। लेकिन TDS काटने की भी कुछ कंडीशन्स है। अगर एक साल में FD से 40,000 रुपए तक कमाया तो TDS नहीं काटा जाएगा। अगर कमाई 40,000 रुपए से ज्यादा है तो 10% TDS कटेगा।
पैन कार्ड नहीं देने पर बैंक 20% TDS काट सकता है। 60 साल से ज्यादा उम्र वालों के लिए एक साल में FD से 50 हजार तक की कमाई पर TDS नहीं लगता।
क्या TDS क्लेम किया जा सकता है?
अगर बैंक ने FD पर कमाए इंटरेस्ट पर TDS काटा है और आप टैक्स के दायरे में नहीं आते हैं तो ITR फाइलिंग के वक्त 100% रिटर्न क्लेम कर सकते हैं। यानी जो भी TDS बैंक ने काटा है वो आपके बैंक अकाउंट में वापस आ जाएगा।
वहीं अगर आप टैक्स ब्रैकेट में आते हैं तो बैंक ने जो भी TDS काटा है वो एडजस्ट हो जाएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि TDS के फॉर्म में आप पहले ही टैक्स दे चुके हैं।
