Vijay Kedia Investment Psychology : जब भी कोई निवेशक शेयर बाजार में निवेश करता है, तो वह कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी यानी ROE जरूर देखता है। इससे असल में यह समझने में मदद मिलती है कि कंपनी शेयरधारकों की पूंजी का इस्तेमाल करके कितना मुनाफा कमा रही है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी अपनी जिंदगी का ROE कैसा है? आप हर दिन जो फैसले लेते हैं, जो अनुभव हासिल करते हैं और जिन गलतियों से गुजरते हैं, उनसे कितना सीख रहे हैं?
शेयर के साथ जिंदगी में भी लगाएं ROE
दिग्गज निवेशक विजय केडिया ने इसी सवाल के जरिए निवेशकों को जिंदगी और निवेश के बीच एक अहम कनेक्शन समझाया है। उनका फॉर्मूला है Reflection, Observation और Experience। यानी आत्मचिंतन, ध्यान से चीजों को देखना और अनुभव से सीखना। जहां शेयर बाजार में ROE का मतलब Return on Equity होता है, वहीं जिंदगी के संदर्भ में इन तीन शब्दों से अपनी सोच और समझ को बेहतर बनाने का संदेश मिलता है।
जिंदगी का ROE क्या है?
विजय केडिया का यह फॉर्मूला बताता है कि केवल अपने निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को बढ़ाने के बारे में सोचना पर्याप्त नहीं है। बेहतर फैसले लेने के लिए अपनी समझ और निर्णय क्षमता को भी विकसित करना जरूरी है। इसके लिए Reflection, Observation और Experience को जिंदगी का ROE बनाने की जरूरत है।
रिफ्लेक्शन यानी गलती कहां हुई?
Reflection यानी अपने फैसलों पर विचार करना। मान लीजिए आपने किसी शेयर में निवेश किया और आपको नुकसान हो गया। ऐसे में सिर्फ शेयर की कीमत गिरने पर चिंता करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि गलती कहां हुई। क्या आपने कंपनी के बिजनेस को ठीक से समझा था? क्या आपने बिना रिसर्च के किसी की सलाह पर पैसा लगा दिया? अपने फैसलों की समीक्षा करने से भविष्य में वही गलती दोहराने की आशंका कम हो सकती है।
Observation से समझें बाजार का संकेत
दूसरा कदम है Observation यानी आसपास हो रही घटनाओं को ध्यान से देखना। निवेश के मामले में इसका मतलब केवल शेयरों की कीमतों पर नजर रखना नहीं है। कंपनी का कारोबार, उसकी कमाई, प्रतिस्पर्धा और आर्थिक परिस्थितियां भी समझनी चाहिए।
उदाहरण के लिए, किसी शेयर में तेजी आने पर तुरंत खरीदारी करने के बजाय यह देखना जरूरी है कि तेजी के पीछे कंपनी के प्रदर्शन में सुधार है या बाजार का उत्साह। यही नजरिया निवेशक को तथ्यों और शोर के बीच फर्क करना सिखाता है।
Experience से मिलती है सही सीख
तीसरा हिस्सा है Experience यानी अनुभव। लेकिन अनुभव तभी उपयोगी बनता है, जब उससे कोई सबक निकाला जाए। निवेश में मुनाफा होने पर यह समझना चाहिए कि सफलता के पीछे सही विश्लेषण था या बाजार की तेजी। नुकसान होने पर भी यह देखना चाहिए कि गलती रणनीति में थी या परिस्थितियां बदल गई थीं।
पोर्टफोलियो के साथ खुद पर भी करें निवेश
शेयर बाजार में लंबी अवधि की सफलता के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन और कारोबारी संभावनाओं का आकलन जरूरी है। इसके साथ धैर्य, अनुशासन और अपनी गलतियों से सीखने की क्षमता भी अहम भूमिका निभाती है।
