सुबह की शुरुआत हो या दिनभर की थकान मिटानी हो, चाय हमारे देश की जीवनशैली का एक अहम हिस्सा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी चाय की चुस्की कितनी सुरक्षित है? इसी बात को ध्यान में रखते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने चाय की सुरक्षा और गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। FSSAI ने चाय की पत्तियों में इस्तेमाल होने वाले दो प्रमुख कीटनाशकों की अधिकतम सीमा (MRL - Maximum Residue Limit) तय करने के लिए एक नियम का मसौदा (ड्राफ्ट) जारी किया है। इस ड्राफ्ट पर FSSAI ने संबंधित पक्षों, चाय उत्पादकों और आम जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
चाय में तय होगी कीटनाशकों की सीमा? (तस्वीर-Canva)
किन दो कीटनाशकों पर तय होगी सीमा?
FSSAI के इस प्रस्ताव में मुख्य रूप से दो कीटनाशकों की मात्रा नियंत्रित करने की बात कही गई है:-
- एसीटामिप्रिड (Acetamiprid)
- इमिडाक्लोप्रिड (Imidacloprid)
ये दोनों ही कीटनाशक चाय के बागानों में पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों से बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। FSSAI के नए प्रस्ताव के अनुसार भारत में चाय की पत्तियों में एसीटामिप्रिड की अधिकतम सीमा 20 पीपीएम (PPM - पार्ट्स पर मिलियन) तय करने का विचार है। विदेशी मानकों से तुलना करें तो भारत का यह प्रस्तावित मानक काफी सख्त और सुरक्षित माना जा रहा है। उदाहरण के लिए जापान में एसीटामिप्रिड की अनुमति 30 पीपीएम तक है। अमेरिका में इसकी अधिकतम सीमा 50 पीपीएम तय की गई है। भारत में 20 पीपीएम की सीमा तय करने का साफ मतलब है कि देश के नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को वैश्विक मानकों की तुलना में भी अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।
स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में FSSAI का बड़ा कदम
खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए FSSAI समय-समय पर अपने नियमों को सख्त करता रहा है। हाल ही में संस्था ने ज्यादा जहरीले और खतरनाक माने जाने वाले 13 कीटनाशकों को अपनी स्वीकृत लिस्ट से हटा दिया था। इसका सीधा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हमारे भोजन और पेय पदार्थों में कोई भी खतरनाक रसायन न पहुंचे। FSSAI का मानना है कि कीटनाशकों के अवशेषों (Residues) की मात्रा नियंत्रित रहने से लंबी अवधि में स्वास्थ्य पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है।
भारत में दुनिया से कम होता है कीटनाशकों का इस्तेमाल
अक्सर यह माना जाता है कि भारतीय खेती में रसायनों का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। भारत में खेती के दौरान कीटनाशकों का इस्तेमाल 0.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से भी कम है। दुनिया भर में कीटनाशकों का औसत इस्तेमाल 2.38 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि दुनिया के अन्य प्रमुख कृषि देशों के मुकाबले भारत में फसलों पर रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग काफी नियंत्रित और कम मात्रा में किया जाता है।
सुरक्षा और पैदावार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश
चाय बागानों में कीटों के हमले से पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा रहता है। ऐसे में किसान पूरी तरह से कीटनाशकों का त्याग भी नहीं कर सकते। FSSAI के इस नए प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य दो बातों के बीच सही संतुलन बनाना है। चाय की प्याली पूरी तरह शुद्ध, सुरक्षित और हानिकारक रसायनों से मुक्त रहे। चाय बागानों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों से बचाया जा सके ताकि चाय का उत्पादन प्रभावित न हो और खेती टिकाऊ बनी रहे।
FSSAI द्वारा मांगे गए सुझावों के बाद, अंतिम नियम लागू किए जाएंगे। इस नए नियम से न केवल देश के भीतर बिकने वाली चाय की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय चाय की विश्वसनीयता और निर्यात की क्षमता और मजबूत होगी।
