31 अगस्त से शुरू हो रहे नए कारोबारी हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार की चाल मुख्य रूप से देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़ों, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका की गैर-कृषि पेरोल रिपोर्ट (Non-Farm Payrolls) पर निर्भर करेगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रमुख कारकों के अलावा मैक्रोइकनॉमिक डेटा, अगस्त महीने के ऑटो बिक्री के आंकड़े और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की ट्रेडिंग गतिविधियां भी आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उल्लेखनीय है कि पिछले कारोबारी हफ्ते (17-21 अगस्त) के दौरान घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 276.32 अंक और निफ्टी 76.35 की गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिससे लगातार तीसरे हफ्ते बाजार में मंदी का रुख देखने को मिला।
सोमवार को कैसी रहेगी बाजार की चाल, इन 4 संकेतों से तय होगी दिशा
एक्सपर्ट का क्या है कहना?
बाजार की भावी दिशा को लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि आने वाला कारोबारी हफ्ता निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़े जून 2026 तिमाही के जीडीपी आंकड़े 31 अगस्त को जारी किए जाएंगे। इसके अलावा, निवेशकों की नजर अगस्त महीने के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI आंकड़ों, जीएसटी कलेक्शन, विदेशी मुद्रा भंडार और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल पर भी टिकी रहेगी। वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ा ट्रिगर अमेरिकी रोजगार डेटा होगा, जो 4 सितंबर को जारी होना है। यह आंकड़ा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सितंबर मौद्रिक नीति, डॉलर इंडेक्स और इमर्जिंग मार्केट्स में विदेशी फंड्स के प्रवाह को गहराई से प्रभावित कर सकता है। गौरतलब है कि एफपीआई ने अगस्त में अब तक भारतीय शेयरों में ₹30,919 करोड़ का शुद्ध निवेश किया है।
बाजार की दिशा तय करेंगे ये फैक्टर
जून तिमाही के जीडीपी आंकड़े जोखिम की भावना (Risk Sentiment) को समझने के लिए निर्णायक होंगे। इनसे यह साफ होगा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था किस रफ्तार से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जैक्सन होल सम्मेलन में अमेरिकी फेड चेयर के सख्त बयानों के बाद अब अमेरिकी मौद्रिक नीति वैश्विक बाजारों के लिए सबसे बड़ा उत्प्रेरक (Catalyst) बन चुकी है। अब 4 सितंबर को आने वाली अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट और आगामी मुद्रास्फीति आंकड़े यह तय करेंगे कि सितंबर में ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका बरकरार रहती है या कम होती है।
एचएसटी वेल्थ के फाउंडर और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन का मानना है कि सोमवार को जारी होने वाले भारत के जीडीपी आंकड़े घरेलू आर्थिक वृद्धि की वास्तविक स्थिति दर्शाएंगे। वहीं सप्ताह के अंत में शुक्रवार को आने वाला अमेरिकी रोजगार आंकड़ा वैश्विक बाजार के सेंटिमेंट पर सीधा प्रभाव डालेगा। इन दोनों आंकड़ों के आने के बाद ही निवेशक फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों को लेकर अपनी रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन करेंगे।
