हेल्थ इंश्योरेंस होने पर भी खाली हो सकती है जेब! पॉलिसी की इन 5 कमियों को न करें नजरअंदाज

हेल्थ इंश्योरेंस लेने का मतलब यह नहीं है कि अस्पताल का पूरा बिल बीमा कंपनी ही भरेगी। कमरे का किराया, दवाइयों से जुड़ी चीजें, इलाज की सीमा और पॉलिसी की शर्तें आपके खर्च बढ़ा सकती हैं। इसलिए पॉलिसी की बारीकियां समझना जरूरी है।

हेल्थ इंश्योरेंस आज के समय में मेडिकल खर्चों से बचने का एक जरूरी जरिया बन गया है। गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने पर यह परिवार पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम कर सकता है। लेकिन कई बार बीमा होने के बावजूद मरीज को अस्पताल के बिल का कुछ हिस्सा अपनी जेब से देना पड़ता है। इसकी वजह हमेशा कम बीमा राशि नहीं होती, बल्कि पॉलिसी में मौजूद कुछ शर्तें और सीमाएं भी हो सकती हैं। इसलिए सिर्फ ज्यादा सम इंश्योर्ड देखकर पॉलिसी खरीदना पर्याप्त नहीं है।

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पॉलिसी की इन 5 कमियों को न करें नजरअंदाज

इन 5 बातों का रखें खास ख्याल

1. कमरे के किराये की सीमा: कुछ हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में अस्पताल के कमरे के किराये की अधिकतम सीमा तय होती है। यह सीमा रोज के हिसाब से या बीमा राशि के प्रतिशत के आधार पर हो सकती है। अगर मरीज इससे महंगा कमरा चुनता है, तो कुछ पॉलिसी में कमरे के किराये के साथ दूसरे संबंधित खर्चों पर भी कटौती हो सकती है। इसलिए पॉलिसी लेते समय रूम रेंट और ICU की शर्तें जरूर जांचें।

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