EPFO Investment Plan : कर्मचारियों के भविष्य के लिए जमा होने वाला प्रोविडेंट फंड (PF) का पैसा अब सिर्फ सरकारी बॉन्ड और पारंपरिक निवेश विकल्पों तक सीमित नहीं रह सकता। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अब स्टार्टअप (Startup) और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) में निवेश का रास्ता तलाश रहा है। इसके लिए निवेश से जुड़े नए दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं। यह प्रस्ताव 22 अक्टूबर, 2026 को हुई EPFO की निवेश समिति (Investment Committee) की बैठक में चर्चा के लिए आया था।
EPFO पीएफ की रकम से चाह रहा ज्यादा कमाई
EPFO के पास कितना बड़ा फंड?
EPFO के पास करीब ₹30 लाख करोड़ का रिटायरमेंट फंड है, जिसके लगभग 30 करोड़ सदस्य हैं। अब तक इस फंड का बड़ा हिस्सा अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्पों, खासकर सरकारी सिक्योरिटीज और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाता रहा है।
कितनी रकम का करेगा निवेश?
नए प्रस्ताव के तहत EPFO हर साल मिलने वाली नई रकम का अधिकतम 3% हिस्सा AIF में लगाने पर विचार कर रहा है। इसका मकसद निवेश के विकल्पों में विविधता लाना और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावनाएं तलाशना है। 2023-24 के आंकड़ों के मुताबिक EPFO के पास एक साल में ₹2.92 लाख करोड़ रुपये आए। अगर इसे ही आधार मान लिया जाए, तो हर साल आने वाली इस नई का 3% लगभग ₹8,760 करोड़ सालाना होता है। यानी इस हिसाब से EPFO की तरफ से करीब ₹730 करोड़ हर महीने AIF में निवेश किए जा सकते हैं।
क्या पेंशन फंड पर बढ़ेगा जोखिम?
EPFO का पूरा जोर इस बात पर रहता है कि निवेशकों का फंड सुरक्षित रहे। नई निवेश योजना में भी इस बात का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। प्रस्तावित योजना के तहत नई रकम का 3% निवेश AIF में किया जाएगा। जबकि, EPFO के पास जो मौजूदा ₹30 लाख करोड़ का फंड है। यह उसका हिस्सा नहीं बनेगा। इस तरह नई मिलने वाली रकम पर थोड़ा जोखिम जरूर बढ़ेगा, लेकिन मोटे तौर पर पीएफ का पैसा सुरक्षित रहेगा।
कैसे और कहां होगा निवेश?
रिपोर्ट के अनुसार, EPFO शुरुआत में सीधे अलग-अलग स्टार्टअप में पैसा लगाने के बजाय स्थापित संस्थागत प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश कर सकता है। इसके लिए दो प्रमुख संस्थानों के नाम सामने आए हैं।
नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (NIIF): यह भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य रणनीतिक निवेश के लिए स्थापित एक प्रमुख निवेश प्लेटफॉर्म है।
SIDBI का स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0: इसके जरिए स्टार्टअप इकोसिस्टम में निवेश को बढ़ावा दिया जाता है। सितंबर में इंडस्ट्री प्रमोशन एंड इंटर्नल ट्रेड डिपार्टमेंट (DPIIT) ने EPFO को इस फंड में भागीदारी के लिए पत्र लिखा था।
Startup India Fund of Funds 2.0 के लिए सरकार ने ₹10,000 करोड़ का कॉर्पस निर्धारित किया है। इसके तहत SIDBI SEBI-रजिस्टर्ड कैटेगरी I और कैटेगरी II AIF के जरिए स्टार्टअप्स तक पूंजी पहुंचाने का काम करता है।
स्टार्टअप में कैसे लगेगा पैसा?
EPFO जिन दो श्रेणियों के AIF में निवेश पर विचार कर रहा है, उनका काम अलग-अलग क्षेत्रों में पूंजी उपलब्ध कराना है। कैटेगरी I AIF श्रेणी में स्टार्टअप, वेंचर कैपिटल, छोटे कारोबार (SMEs), इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल वेंचर में निवेश करने वाले फंड आते हैं। वहीं, कैटेगरी II AIF में प्राइवेट इक्विटी (PE), रियल एस्टेट और प्राइवेट डेट फंड शामिल होते हैं।
नवंबर में होगा बड़ा फैसला
EPFO को पांच साल पहले ही AIF में निवेश की अनुमति मिल गई थी, लेकिन अब तक उसने SEBI-रेगुलेटेड कैटेरगी I और कैटेगरी II AIF में निवेश नहीं किया है। वित्त मंत्रालय के नोटिफाइड निवेश पैटर्न के तहत एसेट-बैक्ड और ट्रस्ट-स्ट्रक्चर्ड निवेशों में नई सालाना रकम का 5% तक निवेश करने का प्रावधान है। इसी व्यापक सीमा के भीतर 3% तक AIF निवेश का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
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