आज के समय में UPI से भुगतान करना काफी आसान हो गया है। लोग चाय-पानी के छोटे खर्च से लेकर बड़ी रकम तक का लेनदेन मोबाइल से करते हैं। ऐसे में कई लोगों को चिंता रहती है कि अगर उनके बैंक खाते में बार-बार पैसे आएं या बड़ी रकम ट्रांसफर हो, तो क्या इनकम टैक्स विभाग नोटिस भेज सकता है। इसका जवाब है कि सिर्फ UPI से पैसे भेजने या प्राप्त करने के कारण अपने आप इनकम टैक्स का नोटिस नहीं आता। विभाग मुख्य रूप से यह देख सकता है कि आपके बैंक खाते में होने वाले लेनदेन आपकी घोषित कमाई और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) से मेल खाते हैं या नहीं।
UPI से बार-बार पैसों का लेनदेन करते हैं?
कितनी रकम के UPI ट्रांजैक्शन पर हो सकती है जांच?
लोगों के बीच यह धारणा है कि UPI से एक तय सीमा से ज्यादा पैसे का लेनदेन करने पर इनकम टैक्स विभाग नोटिस भेज देता है। हालांकि, सामान्य UPI ट्रांजैक्शन के लिए ऐसी कोई तय सालाना सीमा नहीं है, जिसके पार होते ही नोटिस आना अनिवार्य हो जाए। उदाहरण के लिए, अगर कोई नौकरी करने वाला व्यक्ति अपने दोस्तों से खाने या घूमने के खर्च के पैसे वापस लेता है, तो केवल खाते में रकम आने से वह उसकी कमाई नहीं बन जाती। लेकिन अगर किसी व्यक्ति की घोषित आय कम है और उसके खाते में बड़ी रकम लगातार जमा हो रही है, तो विभाग जरूरत पड़ने पर पैसे के स्रोत के बारे में पूछ सकता है।
इन परिस्थितियों में बढ़ सकती है परेशानी
अगर कोई दुकानदार, फ्रीलांसर, ट्यूटर या छोटा कारोबारी ग्राहकों से लगातार UPI के जरिए भुगतान लेता है, तो ये रकम उसकी व्यावसायिक या पेशेवर कमाई हो सकती है। ऐसी आय को सही तरीके से दर्ज करना और लागू नियमों के अनुसार ITR में दिखाना जरूरी है। अगर बैंक खाते में कारोबार से जुड़े बड़े ट्रांजैक्शन हो रहे हैं, लेकिन टैक्स रिटर्न में कम आय या कारोबार दिखाया गया है, तो विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है।
इसके अलावा, बैंक खाते में बड़ी रकम नकद जमा करना, संपत्ति खरीदना या अन्य बड़े वित्तीय लेनदेन करना भी जांच के दायरे में आ सकता है, खासकर जब रकम का स्रोत स्पष्ट न हो। निर्धारित नियमों के तहत कुछ नकद लेनदेन की जानकारी बैंक और अन्य संस्थान इनकम टैक्स विभाग को देते हैं। उदाहरण के लिए, एक वित्त वर्ष में बचत खातों में कुल ₹10 लाख या उससे अधिक नकद जमा होने पर निर्धारित शर्तों के तहत रिपोर्टिंग हो सकती है। चालू खातों में नकद जमा या निकासी के लिए ₹50 लाख की रिपोर्टिंग सीमा लागू है। ध्यान दें, ये रिपोर्टिंग की सीमाएं हैं, अपने आप टैक्स नोटिस आने या टैक्स चोरी साबित होने की सीमा नहीं।
टैक्स विभाग की परेशानी से बचने के लिए क्या करें?
अगर आप नियमित रूप से UPI से पैसे लेते हैं, तो हर ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड रखना बेहतर है। कारोबार से होने वाली कमाई के बिल, रसीदें और बैंक स्टेटमेंट संभालकर रखें। दोस्तों या परिवार से मिले पैसे, लोन, खर्च के बंटवारे या किसी दूसरे व्यक्ति की ओर से प्राप्त रकम का उद्देश्य भी स्पष्ट होना चाहिए। जहां संभव हो, निजी और कारोबार से जुड़े लेनदेन के लिए अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल करें।
समय-समय पर अपना Annual Information Statement (AIS), Form 26AS और ITR में दिखाई गई जानकारी भी जांचें। अगर विभाग की ओर से कोई नोटिस या स्पष्टीकरण मांगा जाता है, तो सही दस्तावेजों के साथ जवाब दें। याद रखें, UPI से बार-बार लेनदेन करना अपने आप में गलत नहीं है। असली बात यह है कि पैसे कहां से आए, किस उद्देश्य से आए और क्या आपकी कमाई पर लागू टैक्स नियमों का पालन किया गया है।
