Dhanteras 2026: धनतेरस (Dhanteras 2026) पर सोना खरीदना भारतीय परिवारों में शुभ माना जाता है। इस मौके पर लोग सोने के सिक्के, चेन, अंगूठी और दूसरी ज्वेलरी खरीदते हैं। हालांकि, सोने की कीमत ज्यादा होने के कारण खरीदारी में छोटी-सी गलती भी आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में सिर्फ डिजाइन और कीमत देखकर सोना खरीदना सही नहीं है। आपको सोने की शुद्धता, BIS हॉलमार्क, HUID नंबर और बिल की जानकारी भी जांचनी आनी चाहिए।
सोने की शुद्धता की ऐसे करें पहचान (AI Generated Image)
सोने की शुद्धता कैसे पहचानें?
सोने की ज्वेलरी खरीदते समय सबसे पहले उस पर BIS हॉलमार्क देखना न भूलें। हॉलमार्क में तीन जरूरी निशान होते हैं। पहला BIS का लोगो, दूसरा सोने की शुद्धता बताने वाला कैरेट और फाइननेस नंबर, जबकि तीसरा छह अंकों का अल्फान्यूमेरिक HUID कोड होता है।
उदाहरण के लिए 22 कैरेट सोने पर 22K916 लिखा होता है। इसका मतलब है कि ज्वेलरी में 91.6 प्रतिशत सोना है। वहीं, 18 कैरेट सोने पर 18K750 लिखा होता है, जो 75 फीसदी शुद्ध सोने को दर्शाता है। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलरी पर लिखे इन निशानों को ध्यान से देखें।
BIS Care ऐप से ऐसे चेक करें HUID नंबर
ज्वेलरी पर हॉलमार्क होना जरूरी है, लेकिन उसकी जानकारी की जांच करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लिए आप अपने मोबाइल में BIS Care ऐप डाउनलोड कर सकते हैं। ऐप खोलकर 'Verify HUID' विकल्प चुनें और ज्वेलरी पर लिखा छह अंकों का कोड दर्ज करें। इसके बाद स्क्रीन पर दिखाई गई जानकारी को गहने पर लिखी डिटेल्स से मैच करें। अगर जानकारी मेल नहीं खाती है, तो खरीदारी करने से पहले दुकानदार के सामने अपनी बात रखें।
सोना खरीदते समय बिल में क्या देखें?
सोना खरीदने के बाद बिल जरूर लें। बिल में ज्वेलरी का डिटेल्स, सोने का शुद्ध वजन, कैरेट और फाइननेस की जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा सोने का रेट, मेकिंग चार्ज, लागू जीएसटी और कुल कीमत को भी ध्यान से जांचें। अगर ज्वेलरी में नग या दूसरे सजावटी सामान लगे हैं, तो उनका वजन सोने के वास्तविक वजन से अलग हो सकता है।खरीदारी से पहले दुकानदार से पुराने गहने बदलने और वापस बेचने की शर्तें भी पूछ लें। इससे भविष्य में गहने बेचते समय होने वाली कटौती को समझने में आसानी होगी।
कम शुद्धता वाला सोना मिलने पर क्या करें?
अगर हॉलमार्क वाली ज्वेलरी में निर्धारित शुद्धता से कम सोना मिलता है, तो ग्राहक BIS से मान्यता प्राप्त जांच केंद्र पर उसकी जांच करवा सकते हैं। BIS के नियमों के तहत शुद्धता में कमी साबित होने पर ग्राहक को निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा मिल सकता है। इसके लिए खरीदारी का बिल और जांच रिपोर्ट संभालकर रखना जरूरी है।
